March 15, 2026

• शिपिंग कंपनियों ने भी दोगुना किया किराया

संवाददाता 
कानपुर।
पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब कानपुर-उन्नाव के चमड़ा उद्योग पर भी पड़ने लगा है। निर्यातकों को नए ऑर्डर मिलना लगभग बंद हो गए हैं, जो माल पहले ही समुद्री रास्ते से भेजा गया था, वह कंटेनरों में फंस गया है।
शिपिंग कंपनियों ने पुराने ऑर्डर भेजने के लिए भी कंटेनर का किराया काफी बढ़ा दिया है। निर्यातकों का कहना है कि यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो लेदर उद्योग से जुड़े हजारों लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है।
लेदर एक्सपोर्ट के रीजनल चेयरमैन असद कमाल इराकी ने बताया कि युद्ध जैसे हालात का सीधा असर निर्यात पर पड़ रहा है। शुरुआती आकलन में करीब 2000 करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका जताई गई थी, लेकिन अब जब कई कंपनियों का निर्यात माल समुद्र में ही फंस गया है तो चिंता और बढ़ गई है। उनका कहना है कि निर्यातकों को यह भी स्पष्ट नहीं है कि फंसे हुए कंटेनर अपने गंतव्य तक कब पहुंच पाएंगे।
असद कमाल इराकी के अनुसार, पहले यूरोपीय देशों में एक कंटेनर भेजने का किराया करीब 1200 से 1500 डॉलर के बीच होता था। लेकिन मौजूदा हालात में शिपिंग कंपनियों ने यह किराया लगभग दोगुना कर दिया है। अब एक कंटेनर के लिए 2000 से 3500 डॉलर तक मांगे जा रहे हैं। साथ ही शिपिंग कंपनियां यह भी साफ नहीं बता पा रही हैं कि भेजा गया माल वहां तक कब पहुंचेगा। कई कंटेनरों को गंतव्य तक पहुंचने में 10 से 15 दिन अतिरिक्त लग सकते हैं।
निर्यातकों के मुताबिक पहले यूरोप भेजा गया माल लगभग चार सप्ताह में पहुंच जाता था, लेकिन अब शिपमेंट कई हफ्तों तक रास्ते में अटका रहता है। इसी वजह से विदेशी खरीदार नए ऑर्डर देने से बच रहे हैं। इससे उद्योग के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
कानपुर और उन्नाव का लेदर उद्योग कभी देश के सबसे बड़े निर्यात केंद्रों में गिना जाता था। पहले यहां 400 से अधिक लेदर फैक्ट्रियां संचालित होती थीं, लेकिन वर्तमान में करीब 250 फैक्ट्रियां ही चल रही हैं। इनमें लगभग 30 प्रतिशत छोटी इकाइयां हैं, जहां कच्चा माल तैयार होता है, जबकि करीब 70 प्रतिशत फैक्ट्रियां तैयार चमड़े और लेदर प्रोडक्ट्स का निर्यात करती हैं। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो उत्पादन और रोजगार दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है।