
संवाददाता
कानपुर। मानसून आ चुका है, मानसून अपने साथ जहां गर्मी से राहत लाता है, वहीं कई शहर के दो दर्जन से अधिक इलाकों के लिए दुश्वारियां भी लेकर आता है।
बारिश आते ही शहर के बर्रा, नौबस्ता, किदवई नगर, साकेत नगर, यशोदा नगर, गोविंद नगर, ग्वालटोली, वीआईपी रोड जैसे इलाके जलमग्न हो जाते हैं।
बरसों से स्थानीय लोग बारिश में जलभराव की समस्या का सामना कर रहे है, लेकिन जिम्मेदार अब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं कर सके।
बारिश के मौसम में बाजारों में जलभराव होने से, जहां एक ओर व्यापार प्रभावित होता है, तो वहीं सीवर–वाटर ड्रेनेज लाइन एक होने के कारण कई इलाकों में सीवर का गंदा पानी बैक फ्लो करके लोगों के घरों में भरता है।
कई कई दिनों तक जलभराव होने से लोगों के घरों में दरारें आ चुकी है, जिससे इलाकाई लोगों की राते सांसत में गुजर रहीं है।
वहीं साउथ जोन के जूही खलवा पुल में मात्र 30 मिनट की मूसलाधार बारिश में इतना जलभराव हो जाता है, कि बीते वर्षों की कई लोगों की डूबने से जान तक जा चुकी है।
लोगों ने जलभराव की समस्या के लिए नगर निगम से शिकायत की, तो उन्होंने कागजों पर समस्या का समाधान कर दिया, जबकि धरातल पर हालात जस के तस बने हुए हैं।
दक्षिण क्षेत्र की प्रमुख बाजार गोविंद नगर में चंद पलों की बारिश में ही जलभराव हो जाता है। जिसका प्रमुख कारण है चोक पड़ी नालियां। नाली सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है, बारिश होते ही चोक नालियों से जल निकासी नहीं हो पाती और गंदा पानी दुकानों में घुस आता है।
गोविंद नगर थाने के सामने से बरात घर तक जलभराव की समस्या को रोकने के लिए 200 मीटर लंबी इंटरलाकिंग का प्रस्ताव 2024 में दिया गया था, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत की गई तो अधिकारियों ने आख्या लगा दी कि काम प्रगति पर है, लेकिन धरातल पर कार्य की शुरुआत तक नहीं हुई।
गोविंद नगर जी ब्लॉक में बीते 2 सालों ने सीवर का पानी ओवरफ्लो हो रहा है। शिकायत करने पर कर्मचारी खानापूर्ति कर चले जाते हैं।
बारिश में तो हालात बद से बदतर हो जाते हैं, कई–कई दिनों तक जलभराव बना रहता है। जलभराव होने से आसपास की जमीन धंस रही है। लोगों का वहीं से आवागमन होता है, कभी भी कोई हादसा हो सकता है।
बर्रा 6 क्षेत्र में नए नाले तो डाले गए, लेकिन जहां बरसाती पानी की निकासी होनी चाहिए, वहां सफाई ही नही हुई।
इलाके में 30–30 फीट के नाले है, जिनकी सफाई नहीं हुई। सभी गलियों की नालियां चोक है। नालों के क्षतिग्रस्त होने का प्रमुख कारण केस्को के पोल भी है। बिजली पोल नालों के ऊपर होने के कारण उनके ईट नाले में गिर रहे है, और नाले चोक हो रहे है।
पार्षद नवीन पंडित ने बताया कि 6 वार्डों का पानी बरसाती नाले और सीटीआई नाले में जाता है, नाला पुराना और जर्जर होने के कारण जलभराव की समस्या होती है। 1.20 लाख रुपए चावला मार्केट से नटराज टाकीज तक गहरी सीवर लाइन डालने के लिए बजट पास हो गया है।
लेकिन मजबूरी यह है कि बरसात शुरू हो गई। अगर खोदाई कराई जाती है तो लोगों को समस्या होती, इसलिए बरसात के बाद काम शुरू कराया जाएगा। अगले साल से लोगों को जलभराव की समस्या से राहत मिलेगी।
इसके साथ ही यही हाल किदवई नगर, साकेत नगर, उस्मानपुर व जूही इलाके का भी है। वार्ड–18 उस्मानपुर के पार्षद पति विजय गौतम ने बताया कि उस्मानपुर में तीन नाले साकेत नगर चौराहे से विष्णु बैंड तक, मौरंग मंडी चौराहे से शिवाजी स्कूल तक व विष्णु बैंड से कामर्शियल पार्क होते हुए मौरंग मंडी तक के नाले में सफाई कार्य अब तक नहीं हुआ है। यह तीनों नाले इलाके के प्रमुख नाले है, जो कूड़े से पटे पड़े हैं।
नगर आयुक्त से नाला सफाई कराने की शिकायत भी की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि दीप टाकीज तिराहे से जूही गौशाला, किदवई नगर थाने से सुभाष स्मारक, वेंडी स्कूल समेत आसपास की गलियों में भीषण जलभराव की समस्या से लोगों को हर साल सामना करना पड़ता है।
वहीं जूही खलवा पुल पर जलभराव न हो इसके लिए कानपुर नगर निगम ने विशेष व्यवस्था की है। नगर आयुक्त सुधीर कुमार ने बताया कि जूही खलवा पुल पर वाटर पंप हाउस की क्षमता कम होने के कारण ओवरफ्लो हो जाता है। पुल पर दो पंप पहले से लगे हुए है, इस बार तीन पंप लगाए गए है।
पुल पर जलभराव होते ही 20 से 30 मिनट में पानी निकाला जाएगा। इसके साथ ही जलभराव की दशा में एहतियातन पुल के 500–500 मीटर दायरे पर बैरिकेडिंग लगाई गई है।






