
संवाददाता
कानपुर। शहर में कोडिन युक्त कफ सिरप व नशीली दवाओं का अवैध धंधा करने वाले अपनी जड़ें जमाए हुए हैं। 11 नवंबर को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त डॉ. रोशन जैकब की छापेमारी में चार फर्मों में कोडिन युक्त कफ सीरप व ट्रामाडोल टैबलेट्स मिली, जिनकी बिक्री व वितरण का कोई अभिलेख नहीं मिला।
मामले में डॉ. रोशन जैकब ने एनडीपीएस व बीएनएस की धाराओं में एफआईआर के निर्देश दिए थे। मामले में ड्रग इंस्पेक्टर ओमवीर की तहरीर पर कलक्टरगंज पुलिस ने मुकदमा तो दर्ज कर लिया लेकिन एनडीपीएस की धाराएं नहीं लगाई।
आयुक्त के निर्देश पर ड्रग विभाग की ओर से तहरीर में लिखा गया है कि नारकोटिक्स श्रेणी की दवाओं का विक्रय गैर चिकित्सकीय उपयोग करने की नियत से किया गया। इतना लिखने के बाद भी विनोद अग्रवाल पर दर्ज मुकदमे में एनडीपीएस की धारा नहीं लगी है।
मामले में ड्रग विभाग का कहना है कि एनडीपीएस में मुकदमा दर्ज होना था, लेकिन पुलिस का कहना है कि इसको जांच में बढ़ाएंगे।
11 अक्टूबर को डॉ. रोशन जैकब बिरहाना रोड स्थित अग्रवाल ब्रदर्स, मेडिसिना हेल्थकेयर कोपरगंज, वेदांश फार्मास्युटिकल्स व मोसाईको एजेंसीज में छापेमारी के दौरान कोडीनयुक्त कफ सीरप व नारकोटिक्स श्रेणी की औैषधियों की भारी मात्रा के साथ साथ कई प्रकार की अवसानित औषधियों की भारी मात्रा एक साथ भंडारित पाई गई।
छापेमारी के दौरान विक्रय प्रतिष्ठान से कंप्यूटर हटा दिए गए साथ ही स्वामी भी उपस्थित नहीं हुए।
विभाग द्वारा जारी प्रेसनोट में कहा गया कि इनकी नारकोटिक्स श्रेणी की औषधियों के अवैध व्यवसाय में शामिल होना प्रतीत होता है। इन चारों फर्मों के खिलाफ एनडीपीएस व बीएनएस की धाराओं में एफआईआर कराए जाने के निर्देश दिए गए।
डॉ. रोशन जैकब की ओर से निर्देश दिए गए थे कि कोडीनयुक्त कफ सीरप व नारकोटिक्स श्रेणी की औषधियों के भंडारण व विक्रय में अनियमितता के चलते पूर्व में बालाजी मेडिकल्स, मॉ दुर्गा मेडिकोज, एएस हेल्थकेयर व आरएस हेल्थकेयर पर एफआईआर में भी एनडीपीएस की धाराओं को जुड़वाया जाए। इन एफआईआर में भी अभी तक एनडीपीएस को नहीं जोड़ा गया है।
कलक्टरगंज पुलिस ने ड्रग इंस्पेक्टर की तहरीर पर जो मुकदमा दर्ज किया है, उसमें लगाई गई बीएनएस की सभी धाराएं जालसाजी व सरकारी कर्मचारी को काम करने से रोकने या हमला करने की है।
मामले में डीसीपी ईस्ट सत्यजीत गुप्ता ने बताया कि एनडीपीएस मादक पदार्थों की बिक्री या पकड़े जाने पर लगता है। मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जांच में लैब की रिपोर्ट में या किसी अन्य जरिए से मादक पदार्थों जैसी बात सामने आएगी तो एनडीपीएस की धारा बढ़ा दी जाएगी।






