
संवाददाता
कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर जनस्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहचान बना रहा है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सामाजिक उत्तरदायित्व और व्यावसायिक दक्षता के समन्वय से विश्वविद्यालय ने 2024 में मास्टर ऑफ पब्लिक हेल्थ कार्यक्रम की शुरुआत की, जो आज छात्रों को स्थानीय समस्याओं के वैश्विक समाधान देने की दिशा में एक मजबूत मंच प्रदान कर रहा है। यह कोर्स आज उन छात्रों के लिए एक सशक्त माध्यम बन चुका है जो समाज की बेहतरी के साथ-साथ एक वैश्विक करियर की तलाश में हैं।
एमपीएच एक ऐसा बहुविषयक कार्यक्रम है जो चिकित्सा, समाजशास्त्र, सूचना प्रौद्योगिकी, प्रबंधन, जीवन विज्ञान, कानून, पर्यावरण विज्ञान और अन्य क्षेत्रों को समेटे हुए है। यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को जनस्वास्थ्य प्रबंधन, स्वास्थ्य नीति, महामारी विज्ञान, बायोस्टैटिस्टिक्स, पर्यावरणीय स्वास्थ्य, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य जैसे विविध विषयों में दक्ष बनाता है।
इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को नीतिगत योजना, समुदाय आधारित हस्तक्षेप, अनुसंधान और नेतृत्व क्षमता प्रदान करना है जिससे वे जनस्वास्थ्य प्रणाली को प्रभावशाली बना सकें।
डिपार्टमेंट ऑफ लाइफलॉन्ग लर्निंग एंड एक्सटेंशन द्वारा संचालित यह दो वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम मात्र 16,200 वार्षिक शुल्क पर उपलब्ध है। इसकी खासियत है शोध और फील्ड वर्क आधारित शिक्षण, जिसके अंतर्गत विद्यार्थी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जाकर वास्तविक जनस्वास्थ्य समस्याओं पर काम करते हैं।
विद्यार्थियों को सर्वेक्षण, डेटा संग्रहण, विश्लेषण और हस्तक्षेप परियोजनाओं के माध्यम से जनस्वास्थ्य की जमीनी हकीकत को समझने और समाधान निकालने का व्यावहारिक अवसर मिलता है।
विश्वविद्यालय का एमपीएच प्रोग्राम विद्यार्थियों को स्थानीय समस्याओं को वैश्विक दृष्टिकोण से हल करने की क्षमता प्रदान करता है। इसी उद्देश्य के तहत विश्वविद्यालय ने प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ रणनीतिक साझेदारियाँ स्थापित की हैं। विशेष रूप से, विटामिन एंजेलस संस्था के साथ हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन उल्लेखनीय है – यह संस्था वैश्विक स्तर पर मातृ एवं शिशु पोषण में अग्रणी भूमिका निभा रही है। इस साझेदारी के अंतर्गत विश्वविद्यालय के चार विद्यार्थियों हर्ष शर्मा, प्रियांशु, ऋषभ और वर्तिका को 18,000 प्रतिमाह के मानदेय पर इंटर्नशिप प्रदान की गई है, जो उन्हें वैश्विक अनुभव के साथ व्यावसायिक प्रशिक्षण भी प्रदान करता है।
एमपीएच कोर्स के बाद छात्र स्वास्थ्य संचार विशेषज्ञ, पर्यावरणीय स्वास्थ्य अधिकारी, सार्वजनिक नीति सलाहकार, अनुसंधानकर्ता, एनजओ निदेशक, सामुदायिक कार्यकर्ता, स्वास्थ्य केंद्र प्रशासक जैसे प्रमुख पदों पर कार्य कर सकते हैं। भारत में ही नहीं, यूएएसए, यूके, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में एमपीएच की भारी मांग है।






