January 22, 2026

संवाददाता

कानपुर। नगर में एक ऐसा मामला सामने आया है कि पुलिस ने एक वांटेड अपराधी को सुरक्षा दे रखी थी। इतना ही नहीं वह थाने से लेकर पुलिस अफसरों के साथ उठता-बैठता था। मामले का खुलासा होने के बाद स्वरूप नगर पुलिस ने उसे दबोचा और फिर छोड़ दिया। पुलिस के उसे हिरासत में लेने और फिर छोड़ने का सीसीटीवी फुटेज वायरल होने के बाद उसे दोबारा हिरासत में लिया गया है। अब उसे जेल भेजने की बात अफसरों ने कही है, लेकिन पूरे मामले को लेकर अब तक अफसर कुछ भी स्पष्ट रूप से कहने से बच रहे हैं।

अनवरगंज फूल वाली गली में रहने वाले भाजपा नेता अकील अहमद खान के खिलाफ स्वरूप नगर थाने में 2020 में कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और धोखाधड़ी समेत अन्य गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज हुई थी। वहीं, दूसरा एफआईआर कर्नलगंज थाने में मारपीट व धमकी देने की दर्ज हुई थी।  इन दोनों मुकदमों में आरोपी अकील अहमद कोर्ट से गैरहाजिर होने के चलते वांटेड चल रहा था। इसमें मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इसके खिलाफ अरेस्टिंग वारंट भी जारी किया था। दोनों मुकदमों में फरार चल रहे आरोपी अकील ने ही जेल भेजे गए सपा के पूर्व विधायक इरफान सोलंकी के खिलाफ कई मुकदमें दर्ज कराए थे। इसके बाद से उसे कानपुर पुलिस ने सुरक्षा दे रखी थी।

अब मामले में जब कुछ लोगों ने कानपुर पुलिस कमिश्नर और डीसीपी से शिकायत करते हुए बताया कि वांटेड चल रहे अकील अहमद को कानपुर पुलिस ने ही सुरक्षा मुहैया करा रखी है। मामले में जांच पड़ताल में आरोप सही पाया गया तो स्वरूप नगर थाने की पुलिस ने आरोपी अकील को सोमवार सुबह हिरासत में लिया, लेकिन उसके रसूख के चलते चंद घंटे में ही उसे थाने से छोड़ दिया गया। जब यह मामला सोशल मीडिया पर भी तूल पकड़ने लगा और सीसीटीवी वायरल हुआ तो पुलिस ने उसे दोबारा मंगलवार को अरेस्ट कर लिया और जेल भेज दिया।

आखिर एक वांटेड अपराधी को कानपुर पुलिस ने सुरक्षा कैसे दे दी। जब इस मामले को लेकर डीसीपी सेंट्रल अतुल श्रीवास्तव से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। दूसरा सवाल पूछा कि अकील अहमद खान को हिरासत में लेने के बाद छोड़ क्यों दिया गया, इसका सीसीटीवी भी सोशल मीडिया पर वायरल है…? इस पर वह कोई जवाब नहीं दे सके। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि तीन महीने पहले सुरक्षा हटा दी गई थी, जब उन्हें वीडियो शेयर करते हुए बताया गया कि 10 जनवरी को डीएम ऑफिस में ज्ञापन देने गया था तब उसकी उसकी सुरक्षा में पुलिस कर्मी मौजूद था, तो पुलिस फिर से अपने बयान से पलट गई और कहा कि इसे गवाह सुरक्षा के तहत तीन महीने पहले दोबारा सुरक्षा दे दी गई थी।

पुलिस की घोर लापरवाही का मामला होने के चलते पुलिस इस पूरे मामले में कोई भी जवाब नहीं दे सकी न ही जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई या जांच की बात कही है। पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल के स्टाफ ऑफिसर अमरनाथ यादव ने बताया कि अकील अहमद को मंगलवार को अरेस्ट करके जेल भेज दिया गया है। लेकिन छोटे-छोटे गुडवर्क में फोटो-वीडियो जारी करने वाली पुलिस ने आरोपी का पुलिस हिरासत में जेल भेजने की फोटो तक देने से इनकार कर दिया।

आरोपी अकील अहमद खान ने फरारी के दौरान पुलिस सुरक्षा तो ले ही रखी थी। इतना ही नहीं थाने-चौकी से लेकर पुलिस कमिश्नर के साथ उठता-बैठता था। इसके साथ ही अफसरों के साथ अपने फोटो-वीडियो साेशल मीडिया पर शेयर करके लोगों पर रौब गांठने के साथ ही परेशान भी करता था। अकील ने खुद ही अपने फेसबुक आईडी पर पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल से लेकर अन्य अफसरों के साथ मिलने की तस्वीरें शेयर की हैं।

अकील अहमद ने सपा के पूर्व विधायक इरफान सोलंकी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके बाद से वह चर्चा में आया था। अकील खुद को भाजपा का पदाधिकारी बताता था। इसके साथ ही अपनी गाड़ी में भाजपा का झंड़ा लगाकर भाजपा अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ से संबंधित हर बैठक में शामिल होता था।

Related News