March 3, 2026

संवाददाता

कानपुर।  दिल्ली ब्लास्ट के बाद लेडी टेररिस्ट डॉ. शाहीन सईद के मददगारों की जांच में सुरक्षा एजेंसियां जुट गई हैं। कानपुर में एटीएस और एनआईए की टीमों ने 12 से अधिक जगहों पर छापेमारी की है। इस दौरान हितकारी नगर से हरियाणा नंबर की एक कार भी बरामद की।
इसके अलावा, कानपुर मेडिकल कॉलेज छोड़कर बिना बताए गायब होने वाले 7 डॉक्टरों से पूछताछ की गई है। पूछताछ में अधिकतर डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज छोड़ने का कारण कम सैलरी और ज्यादा खर्च बताया। 

वहीं, शाहीन के भाई के ससुराल वालों से भी एजेंसियों ने पूछताछ की है। दरअसल, एजेंसियों को इनपुट मिले थे कि शाहीन सईद ब्लास्ट से 25 दिन पहले कानपुर आई थी। शाहीन के साथ कितने डॉक्टरों ने कानपुर मेडिकल कॉलेज में जॉइन किया था, उनमें से कौन-कौन उससे करीबी संबंध रखते थे। किसका उसके घर आना-जाना था। इससे जुड़ा पूरा डेटा खंगाला जा रहा है।
दिल्ली ब्लास्ट के बाद यूपी से अब तक 5 डॉक्टरों की एजेंसियां उठा चुकी है। सबसे पहले सहारनपुर के डॉ. आदिल को पकड़ा गया। फिर लखनऊ की रहने वाली डॉ. शाहीन सईद और उसके भाई परवेज को एटीएस ने गिरफ्तार किया।
इसके बाद कानपुर हृदय रोग संस्थान के डॉ. आरिफ को भी हिरासत में लिया। हापुड़ के प्राइवेट जीएस मेडिकल कॉलेज के डॉ. फारूख को एजेंसियों ने उठाया था। हालांकि, पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया।
लखनऊ में दिल्ली आतंकी हमले की जांच नए मोड़ पर आ गई है। जांच एजेंसियों को अब ऐसे संकेत मिले हैं जिनका नाता इंटीग्रल यूनिवर्सिटी, नौकरी और ‘तमीम’ नाम से जुड़ी साख से दिखता है। सूत्रों के मुताबिक, डॉ. परवेज को विश्वविद्यालय में नौकरी रेफरेंस के जरिए मिली थी। उसे लखनऊ में मकान भी खरीदवाया था। शाहीन और तमीम के नामों पर कुछ नियुक्तियां दर्ज मिली हैं। मड़ियांव में परवेज के आवास दिलाने में भी तमीम का नाम सामने आया है, जिसे लेकर एनआईए और एटीएस दोनों गहरे स्तर पर पूछताछ कर रही हैं। 

डॉ. शाहीन 2 साल तक संयुक्त अरब अमीरात में रह चुकी है। एजेंसियों को शक है कि वहां पर डॉ. शाहीन को जैश की महिला विंग जमात उल मोमिनात को तैयार करने की ट्रेनिंग दी गई। शाहीन ने साल 2016 से 2018 के बीच यूएई में रहकर नौकरी की थी।शाहीन दिल्ली ब्लास्ट से 2 महीने पहले लखनऊ आई थी। अयोध्या भी गई थी।
यह बात भी सामने आ रही है कि डॉ. शाहीन ने कानपुर के डिफेंस एरिया में भी रेकी की थी। इलाके में लगे कैमरों में शाहीन की यह हरकत रिकॉर्ड हुई है। ऐसे में जांच एजेंसियां पड़ताल कर रही हैं कि डॉ. शाहीन ने पिछले 10 सालों में कौन-कौन से शहरों की यात्रा की। किस-किस से मिली?
कानपुर के कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट प्रशासन ने डॉ. आरिफ की सैलरी रोक दी। अस्पताल प्रशासन की ओर से बनाई गई कमेटी ने जांच भी शुरू कर दी है। 10 बिंदुओं पर बनाए गए ड्राफ्ट में नाम, राज्य और धर्म का उल्लेख किया गया है। पहले चरण में प्रथम वर्ष के 30 छात्रों का सत्यापन हो रहा है। डॉ. आरिफ का नाम दिल्ली बम धमाके के षड्यंत्र में शामिल डॉ. शालिनी के नेटवर्क से जुड़ गया है। इसी कारण इस पर कार्रवाई की गई है। इसे सुरक्षा एजेंसी पिछले दिनों उठा ले गई थी।
एनआईए, एटीएस, इंटेलिजेंस ब्यूरो, खुफिया समेत कई केंद्रीय व राजकीय एजेंसियां सक्रिय हैं। अलग-अलग जांच में सामने आया है कि डॉ. शाहीन के भाई डॉ. परवेज की ससुराल कानपुर में है। यहां उनके कई और रिश्तेदार भी रहते हैं। सूत्रों के मुताबिक कुछ दिन पहले डॉ. शाहीन के ससुरालीजनों के यहां आने के सुराग मिले थे। इस पर जांच एजेंसी उसका ब्योरा हासिल करने के लिए शहर पहुंची। यहां उनको सटीक लोकेशन नहीं मिल सकी। कुछ रिश्तेदारों ने जांच एजेंसी को रेलबाजार और बाबूपुरवा क्षेत्र की जानकारी दी। टीम वहां गई और शाम को डिटेल लेकर कर रवाना हो गई।
कानपुर प्रशासन ने आईआईटी, एचबीटीआई और रामा विश्वविद्यालय से कानपुर में रह रहे करीब 150 कश्मीरी छात्रों का ब्योरा मांगा है। उनसे कहा गया है कि वे कश्मीरी छात्रों के पिछले 48 घंटे की गतिविधियों की रिपोर्ट बनाकर सील बंद लिफाफे में दे। साथ ही उन छात्रों का भी ब्यौरा दिया जाए जिन्होंने दिल्ली ब्लास्ट के बाद शहर छोड़ दिया है।