February 17, 2026

संवाददाता

कानपुर। बीजेपी मेयर और पार्षदों के बीच चल रहे विवाद मामले में पार्षदों ने 46 दिन बाद दिल्ली में प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी से मुलाकात की। पार्षदों ने कानपुर शहर की समस्याओं को लेकर एक ज्ञापन सौंपा।
साथ ही मेयर द्वारा किए गए निष्कासन के मामले में भी अलग से ज्ञापन दिया। पार्षद पवन गुप्ता ने बताया- प्रदेश अध्यक्ष मेरे “बॉस” हैं। उन्होंने आश्वासन दिया है कि न्याय होगा। उन्होंने 15 फरवरी के बाद लखनऊ आकर मिलने के लिए भी कहा है।
दिल्ली में कानपुर के तीन पार्षदों पवन गुप्ता, विकास जायसवाल और लक्ष्मी कोरी ने प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात कर अपनी बात रखी। पार्षद पवन गुप्ता ने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात बेहद सकारात्मक रही। उनसे मिलकर लगा कि वह भी एक जमीनी कार्यकर्ता हैं। प्रदेश अध्यक्ष ने पार्षदों से कहा- मैं भी पार्षद रह चुका हूं, दर्द समझ सकता हूं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि न्याय होगा।
पार्षदों की ओर से दिए गए ज्ञापन में नगर निगम की ओर से बनाए गए मंगल भवन का भी मुद्दा उठाया। बताया कि मंगल भवन का मुद्दा नगर निगम सदन में उठाने पर रोका गया। दो पार्षद आकर्ष बाजपेई और सौरभ देव ने गालियां दी। इन दोनों पार्षदों को निलंबित किया जाए।
इसके अलावा पार्षदों ने यह भी शिकायत की है कि 22 जनवरी को प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के रोड शो के दौरान लगे उनके होर्डिंग और बैनर उसी रात हटवा दिए गए, जबकि अन्य बैनर और पोस्टर लगे रहे। इसे पार्षदों ने लिखित ज्ञापन में अनुशासनहीनता बताया है।
पार्षदों ने रविवार को दिल्ली में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की थी। पवन गुप्ता ने बताया कि रक्षामंत्री ने आश्वासन दिया कि इस मामले में प्रदेश अध्यक्ष से बात करके आगे का निर्णय लिया जाएगा। पार्षदों ने सोमवार को राष्ट्रीय महासचिव अरूण सिंह से भी मुलाकात की थी।
नगर निगम सदन में 26 दिसंबर 2025 को हंगामा हुआ। इसके बाद महापौर प्रमिला पांडेय ने पार्षद अंकित मौर्य और पवन गुप्ता को सदन से निष्कासित कर दिया। निष्कासन के विरोध में चार अन्य पार्षद भी महापौर और उनके बेटे पर क्षेत्रीय विकास कामों के लिए बजट न देने का आरोप लगाते हुए दोनों पार्षदों के समर्थन में सामने आए थे, जिससे विवाद और गहरा गया था।
जिले के प्रभारी मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने हस्तक्षेप करते हुए पार्षदों के साथ बैठक की और महापौर सहित भाजपा उत्तर और दक्षिण जिलाध्यक्षों को निष्कासन समाप्त कराने के निर्देश दिए थे। जिला अध्यक्षों ने जल्द कार्रवाई का भरोसा दिलाया था, लेकिन इतने दिन बीतने के बाद भी कोई फैसला नहीं हो सका।
जनवरी में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पंकज चौधरी के पहले शहर दौरे को देखते हुए पार्टी ने आंतरिक विवाद को खत्म करने की कोशिश की, हालांकि प्रदेश अध्यक्ष के दौरे के लगभग 15 दिन बाद भी निष्कासन पर निर्णय न होने पर अब निष्कासित पार्षद फिर से सक्रिय हो गए हैं। इसके बाद उन्होंने राजनाथ सिंह से रविवार को मुलाकात की थी।
वहीं तीन पार्षदों ने दिल्ली में प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी से मुलाकात की। पार्षद पवन गुप्ता, विकास जायसवाल और लक्ष्मी कोरी ने प्रदेश अध्यक्ष को एक ज्ञापन सौंपा।
पार्षदों के निष्कासन के डेढ़ महीने बाद एक बार फिर मामला गरमा गया है। पहले पार्षदों ने शहर के नेताओं से मुलाकात कर अपनी शिकायत रखी थी। इसके बाद वे विवाद को लेकर लखनऊ भी गए थे, लेकिन करीब 45 दिन बीतने के बाद भी जब इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो पार्षदों ने अब दिल्ली का रुख किया है।
पार्षदों का कहना है कि उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के पास जाकर अपनी बात रखी है, लेकिन हर जगह से केवल निष्कासन वापस लेने का आश्वासन ही मिला है। कोई निर्णय न होने के कारण उन्हें दिल्ली जाना पड़ा। 

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