March 10, 2026

संवाददाता

कानपुर। इरफ़ान सोलंकी को जमानत मिलने के बाद उनकी विधायक पत्नी नसीम बोलीं कि अब हम दोनों राजनीति करते रहेंगे। चुनावी मैदान में कौन होगा, यह पार्टी तय करेगी। 

अखिलेश यादव ने मुसीबत के दिनों में बड़े भाई की तरह फर्ज निभाया। इरफान की जमानत के बाद उनका फोन आया था। उन्होंने बधाई दी। मेरी मन्नतें पूरी हुईं। अब इरफान के साथ अजमेर जाऊंगी। जिन लोगों ने भी मेरा साथ दिया। मैं उन्हें शुक्रिया कहना चाहती हूं।

दरअसल, गुरुवार को इरफान सोलंकी को गैंगस्टर मामले में हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। उस वक्त नसीम प्रयागराज में ही थीं। खबर सुनते ही उनकी आंखें भर आईं। वह देर शाम कानपुर के जाजमऊ स्थित घर पहुंचीं। बच्चे-सास को मिठाई खिलाईं।
नसीम ने कहा कि हमें इंसाफ मिलना था, इसीलिए सब्र के साथ कोर्ट पर भरोसा रखते हुए इस दिन का इंतजार कर रहे थे। 
हमारा पूरा परिवार जनता की सेवा के लिए है। हर एक इंसान जनता की सेवा के लिए समर्पित है। हमारे पास विधायक का टैग हो या नहीं, मैं पालिटिक्स करती रहूंगी। आगे जो भी विधायक रहेगा। वह जनता की सेवा करेगा। हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष जी और हाई कमान तय करेगा, कौन-कहां से लड़ेगा और कितने टिकट होंगे। उस पर हम अभी कोई चर्चा नहीं करेंगे।
अखिलेश यादव का फोन आया​​​​ था। उन्होंने बधाई दी। आशीर्वाद दिया और खुश रहने के लिए कहा। अखिलेश ने कहा है कि पार्टी हमेशा साथ है। हम दोनों लोग उनसे मिलने जाएंगे।
हमारी लड़ाई में सबका बहुत ज्यादा सपोर्ट था। कोर्ट-कचहरी, चुनाव हर जगह पार्टी ने मेरा साथ दिया। खास तौर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष जी ने। उन्होंने वाकई में एक बड़े भाई की भूमिका निभाई।
2 साल 10 महीने में कोई ऐसा पल नहीं, जिसको हम याद करना चाहेंगे। बस वह पल जरूर याद रहेगा कि जब हम जीते थे, विधायक बने थे और जब इरफान से मिले थे तो वह सर्टिफिकेट उनके हाथ में दिया था। कोई दुख का पल हम याद नहीं करना चाहते।
सबसे पहले तो दुआ यह है कि इरफ़ान सही सलामत घर आ जाएं। बच्चों को समय दें। हमारे परिवार में हर अच्छे काम में अजमेर शरीफ जाते हैं। यह तो बहुत बड़ी जीत है। इंशाअल्लाह इसके लिए हम अजमेर जाएंगे। निजामुद्दीन औलिया में जाएंगे। हम लोगों में जो सबसे बड़ी चीज है, उमरा पर जाना और हज पर जाना। उसकी भी इच्छा है।
मेरा पूरा परिवार मेरे साथ रहा है। अपनों ने मेरा साथ दिया। एक शख्स ऐसा है, जो मेरा दाहिना हाथ है। मेरी ताकत है। वह है मेरा छोटा भाई अरशद सोलंकी। उसने मुझे बहुत ताकत दी। वह मेरे साथ जुटा रहा।
बेल के लिए तो बिल्कुल न्याय मिलना था। बस देरी हो रही थी। फिर भी ऊपर वाले का शुक्र है। हमें इंसाफ मिलना था। इसीलिए हम सब्र के साथ न्यायालय पर भरोसा रखते हुए इस दिन का इंतजार कर रहे थे। इसलिए भरोसा था कि कोर्ट से इंसाफ मिलना तय है।