
विश्ववार्ता
कानपुर । छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एडवांस्ड एग्रीकल्चर साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी द्वारा आयोजित दो दिवसीय सांस्कृतिक-कृषि महोत्सव एग्रीफेस्ट 2026 – फागुन की फुलवारी का पहले दिन की शुरूआत शुक्रवार को परिसर के सीनेट हॉल के लॉन में हुई ।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि कानपुर के मशहूर हास्य कलाकार अन्नू अवस्थी रहे । उन्होंने अपने हास्य-व्यंग्य और मजेदार प्रस्तुति से सभी को हंसते-हंसते लोट-पोट कर दिया और पूरा सभागार हास्य-व्यंग्य से ठहाकों से गूंज उठा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा, “एग्रीफेस्ट का मकसद ग्रामीण परंपराओं को आधुनिक कृषि विज्ञान से जोड़ना, छात्रों में नवाचार की भावना जगाना और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करना है। ऐसे आयोजन छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए बेहद जरूरी हैं।”
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि आयुवेदाचार्या डॉ. वंदना पाठक ने भारतीय संस्कृति, परंपराओं और नैतिक मूल्यों पर प्रेरक विचार साझा किए। उन्होंने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का आह्वान भी किया। और इस आयोजन की सराहना भी की । इस महोत्सव में पारंपरिक ग्रामीण खेल, लोकनृत्य, समूह गान और “ग्राम दर्पण” प्रदर्शनी के जरिए कृषि नवाचारों, गांव की जीवनशैली और लोक-संस्कृति की जीवंत झलक दिखाई गई, जिसे सभी लोगों खूब सराहा।
इस अवसर पर स्कूल ऑफ एडवांस्ड एग्रीकल्चर साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के निदेशक डॉ. हिमांशु त्रिवेदी ने बताया कि यह महोत्सव ग्रामीण परंपराओं, सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और आधुनिक कृषि इनोवेशन को एक मंच पर लाने का शानदार प्रयास है। पहले दिन ही बड़ी संख्या में छात्रों, शिक्षकों और अतिथियों की मौजूदगी ने इसे एक यादगार उत्सव बना दिया। एग्रीफेस्ट 2026 ने संस्कृति, क्रिएटिविटी और कृषि नवाचार के खूबसूरत मेल का भी संदेश दिया है । इस आयोजन में विश्वविद्यालय के सभी संकायो के शिक्षक ,छात्र-छात्राएं मौजूद रहे ।
पहले दिन विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के छात्रों ने पारंपरिक लोकनृत्य और समूह गान की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। इस आयोजन में पिठ्ठू गुपचुप, गिल्ली डंडा जैसे पारंपरिक ग्रामीण खेलों के प्रति भी छात्रों में भारी उत्साह देखा गया। आयोजन में पारंपरिक व्यंजनों की भी धूम रही । जिसका स्वाद वहा मौजूद छात्रों ने लिया । यहा पर आंवले का पाउडर, चावल के फरे,भेलपूरी, चाट आदि लजीज व्यंजनों के स्टॉल लगे थे ।






