
संवाददाता।
कानपुर। नगर में राष्ट्रीय शर्करा संस्थान के वैज्ञानिकों ने ‘जल सजग’ विकसित किया है, जोकि गंदे से गंदे पानी को शुद्ध करेगा। हजारों साल पुरानी तकनीक को आधुनिक रूप देते हुए फिल्टर सिस्टम जल सजग को तैयार किया गया है। इस फिल्टर से चीनी मिलों का प्रदूषित पानी को शुद्ध करने में मदद मिलेगी। इस पानी में शुद्धता के सभी पैरामीटर मानक के अनुरूप पाए गए हैं। इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी तरह के रसायन का प्रयोग न करके बल्कि प्रकृतिक चीजों का प्रयोग किया जा रहा है। राष्ट्रीय शर्करा संस्थान के निदेशक प्रो. नरेंद्र मोहन ने बात किया। प्रो. नरेंद्र मोहन की देखरेख में रिसर्च फेलो नीलम चतुर्वेदी व वैज्ञानिक डॉ. सुधांशु मोहन ने मिलकर इस पर शोध किया। यह शोध एक साल से भी जाता समय तक चला। प्रो. नरेंद्र मोहन ने बताया कि जल सजग से शुद्ध किया हुआ पानी केंद्रीय व राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सभी मानकों को पूरा कर रहा है। इस तकनीक से चीनी मिलें कम खर्च में दूषित पानी को फिल्टर कर शुद्ध कर सकती है। इस तकनीक से शुद्ध करने के बाद पानी में बीओडी, सीओडी, टीडीएस के अलावा हैवी मैटल्स (क्रोमियम, आर्सेनिक, सीसा, कैडमियम), माइक्रोबियल प्रदूषण आदि पैरामीटर मानक के अनुरूप मिला है। इस सफलता के बाद सभी ने खुशी जाहिर की है।प्रो. नरेंद्र मोहन ने बताया कि प्राचीन काल में पत्थर, बालू आदि प्राकृतिक चीजों के माध्यम से पानी को शुद्ध किया जाता था। उसी पद्धिती को अपनाते हुए। इसी तकनीक को बेस मानते इस पर शोध शुरू किया। इस तकनीक में सबसे पहले रेत और बजरी वाले इनोवेटिव डीप बेड फिल्टर के माध्यम से पानी को शुद्ध किया गया।





