May 15, 2026

संवाददाता 

कानपुर। हृदय रोग संस्थान में चल रहे एक विशेष अध्ययन का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है और अब दूसरे चरण की शुरुआत कर दी गई है। इस स्टडी का मुख्य उद्देश्य संपूर्ण आनुवंशिक कोड की जांच करके  यह पता लगाना है कि बीमारियों का प्रसार अगली पीढ़ी में कैसे और क्यों हो रहा है।

अगर आपके परिवार में दिल की बीमारी, शुगर या बीपी की समस्या पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है? या आपकी खराब लाइफस्टाइल आपको बीमार बना रही है या फिर आपके जींस में ही यह बीमारियाँ छिपी हैं? इन सवालों के सटीक जवाब अब लक्ष्मीपत सिंहानिया हृदय रोग संस्थान की एक विशेष ‘जीनोम स्टडी’ से मिलने वाले हैं।
अध्ययन के पहले चरण में विशेषज्ञों ने 90 मरीजों का विस्तृत डेटा जुटाया है और अब दूसरे चरण में 250 नए मरीजों की केस हिस्ट्री पर काम शुरू हो गया है। कार्डियोलॉजी के निदेशक प्रो. राकेश वर्मा के अनुसार, इस स्टडी से न केवल दिल की बीमारियों, बल्कि डायबिटीज, हाइपरटेंशन, किडनी, लिवर और हार्मोनल समस्याओं के कारणों की भी गहराई से पड़ताल की जा रही है। विशेषज्ञ यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इन बीमारियों का जेनेटिक आधार क्या है और इन्हें भविष्य में बढ़ने से कैसे रोका जा सकता है।
अक्सर लोग इस उलझन में रहते हैं कि उन्हें बीमारी उनके खान-पान की वजह से हुई है या यह उन्हें विरासत में मिली है। 

प्रो. वर्मा ने बताया कि जीनोम स्टडी से यह पूरी तरह साफ हो जाएगा कि बीमारी का असली विलेन कौन है। अगर कारण जेनेटिक पाया जाता है, तो अगली पीढ़ी को समय रहते सचेत कर उन्हें गंभीर स्थिति में जाने से बचाया जा सकेगा। वहीं, अगर कारण खराब लाइफस्टाइल निकलती है, तो मरीज को अपनी आदतों में सुधार कर निरोगी रहने के ठोस तरीके बताए जाएंगे।
इस स्टडी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा दवाओं की प्रभावशीलता की जांच करना भी है। संस्थान में चल रही इस रिसर्च के दौरान गंभीर मरीजों पर दवाओं का कितना असर हो रहा है और उनके क्या दुष्प्रभाव हो रहे हैं, इसकी भी बारीक जांच की जाएगी। इससे डॉक्टरों को यह समझने में मदद मिलेगी कि किस मरीज को कौन सी दवा और कितनी मात्रा में देनी चाहिए, ताकि बिना किसी नुकसान के बेहतर परिणाम मिल सकें।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस स्टडी के नतीजे आने वाले समय में स्वास्थ्य जगत के लिए गेमचेंजर साबित होंगे। इससे न केवल रोग की गंभीरता को परिवार के अन्य सदस्यों में फैलने से रोका जा सकेगा, बल्कि इलाज को भी एक सही दिशा मिलेगी।
जब डॉक्टर को मरीज के जेनेटिक स्ट्रक्चर की जानकारी होगी, तो वह अनावश्यक दवाओं के सेवन और उनसे होने वाले नुकसान से मरीज को बचा सकेंगे। बीपी, डायबिटीज और मोटापे जैसे खतरों को वक्त रहते पहचान कर उन्हें बढ़ने से पहले ही नियंत्रित कर लिया जाएगा। कुल मिलाकर हृदय रोग संस्थान की यह पहल भविष्य में इलाज को और अधिक सटीक और प्रभावी बनाएगी। 

Related News