• 80 की रफ्तार से सफल रहा ‘हाई स्पीड ट्रायल’।

संवाददाता
कानपुर। कानपुर मेट्रो परियोजना ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए कॉरिडोर-1 के शेष सेक्शन कानपुर सेंट्रल से नौबस्ता तक मेट्रो ट्रेन का सफल ‘हाई स्पीड ट्रायल’ पूरा कर लिया।
मेट्रो ट्रेन को ‘अप-लाइन’ और ‘डाउनलाइन’ दोनों ट्रैकों पर 80 किलोमीटर प्रति घंटा की अधिकतम रफ्तार से दौड़ाकर परीक्षण किया गया। इस दौरान ट्रेन को ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन मोड पर संचालित करके सुरक्षा और तकनीकी मानकों की गहन जांच की गई।
कानपुर मेट्रो कॉरिडोर-1 के अंतर्गत वर्तमान में आईआईटी से कानपुर सेंट्रल तक करीब 16 किलोमीटर हिस्से में यात्री सेवा संचालित हो रही है।
अब कानपुर सेंट्रल से नौबस्ता तक लगभग 8 किलोमीटर लंबे बैलेंस सेक्शन पर कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इस सेक्शन के शुरू होते ही कॉरिडोर-1 पूरी तरह तैयार हो जाएगा और शहरवासियों को सात नए स्टेशन मिलेंगे। इनमें झकरकटी और ट्रांसपोर्ट नगर अंडरग्राउंड स्टेशन होंगे, जबकि बारादेवी, किदवई नगर, वसंत विहार, बौद्ध नगर और नौबस्ता एलिवेटेड स्टेशन के रूप में विकसित किए गए हैं।
हाई स्पीड ट्रायल के दौरान मेट्रो के ब्रेकिंग सिस्टम की क्षमता जांचने के लिए ‘स्पीड ब्रेक टेस्ट’ भी किया गया। ट्रेन को अधिकतम गति से चलाकर अचानक ब्रेक लगाकर उसकी कार्यक्षमता और सुरक्षा मानकों को परखा गया। परीक्षण के समय सिग्नलिंग विभाग के अपर महाप्रबंधक दीपक पांडेय समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी और तकनीकी कर्मचारी मौजूद रहे।
यूपीएमआरसी अधिकारियों के अनुसार, इससे पहले इस सेक्शन पर लो-स्पीड टेस्टिंग की जा चुकी थी, जिसमें ट्रेन को 5 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से चलाकर ट्रैक, सिग्नलिंग और थर्ड रेल सिस्टम की जांच की गई थी। बाद में सॉफ्टवेयर मैप वेरिफिकेशन, टीआरए सिग्नल, एक्सल काउंटर और अन्य तकनीकी उपकरणों की वास्तविक लोकेशन का मिलान कर सिस्टम अपडेट किए गए। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद हाई स्पीड ट्रायल किया गया।
यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने कहा कि कानपुर मेट्रो ने तमाम चुनौतियों के बावजूद तेजी से काम करते हुए शहर के विकास में नया अध्याय जोड़ा है। उन्होंने बताया कि सीएमआरएस निरीक्षण से पहले सुरक्षा के हर मानक पर ट्रेन और सिस्टम का परीक्षण किया जा रहा है। साथ ही कॉरिडोर-2 के निर्माण कार्य को भी तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।






