
संवाददाता
कानपुर। नगर के प्राणी उद्यान में बच्चों के आकर्षण का केंद्र रही टॉय ट्रेन पिछले 3 साल से बंद पड़ी है। जू प्रशासन के मुताबिक इस वर्ष के अंत तक इसके दोबारा पटरियों पर दौड़ने की उम्मीद है। 26 नवंबर 2022 को चकेरी के सफीपुर की रहने वाली एक शिक्षिका अंजू शर्मा की ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच फंसकर बोगी के नीचे आने से मौत हो गई थी। इसके बाद यह ट्रेन बंद कर दी गई थी।
इसके बाद शासन ने इस पूरे मामले की जांच कराई थी, जिसमें कुछ खामियां भी सामने आई थीं। शासन ने कमियों को दूर करने के बाद साल 2024 में टॉय ट्रेन को चलाने के लिए मंजूरी दे दी थी। लेकिन मंजूरी मिलने के 2 साल बाद भी ट्रेन पटरियों पर नहीं दौड़ सकी है।
कानपुर प्राणि उद्यान भारत का तीसरा और उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा चिड़ियाघर है। यह करीब 77 एकड़ जमीन में फैला हुआ है। साल 1971 में इस चिड़ियाघर की नींव रखी गई थी। इस चिड़ियाघर में चंबल से ऊदबिलाव को लाया गया था, जिसका उद्घाटन के समय नाम ‘उदय’ रखा गया था। इसके बाद भारत से चार हाथियों के बच्चों को हवाई जहाज से हॉलैंड भेजा गया था।
उनके बदले समुद्री मार्ग से ज़ेब्रा और जिराफ़ को मुंबई लाया गया, फिर उन्हें कानपुर चिड़ियाघर में रखा गया। इसका उद्घाटन आशुतोष नाम के बच्चे ने 4 फरवरी 1974 को किया था। इसके बाद विभिन्न प्रकार के जानवर चिड़ियाघर में रहने लगे। वर्तमान में यहां करीब 1500 जानवर हैं। 23 जून 1989 को ‘अनोखा’ नामक फिल्म की शूटिंग भी इसी चिड़ियाघर में हुई थी।
कानपुर चिड़ियाघर में टॉय ट्रेन की शुरुआत साल 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कराई थी। इस ट्रेन के लिए दो तरह के टिकट का प्रावधान था- किशोरों के लिए 25 रुपए और वयस्कों के लिए 50 रुपए। 26 नवंबर 2022 को प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका अंजू शर्मा अपने पति सुबोध कुमार शर्मा, बेटे अखिल और बेटी अदिति के साथ चिड़ियाघर घूमने आई थीं। बच्चों की जिद पर वे टॉय ट्रेन से घूमने के लिए प्लेटफॉर्म पर पहुंचीं। बच्चे और पति ट्रेन में बैठ चुके थे, जब अंजू ट्रेन में चढ़ने ही वाली थीं कि अचानक ट्रेन चल पड़ी।
चलती ट्रेन में चढ़ने की कोशिश के दौरान प्लेटफॉर्म पर लगे पोल से उनका सिर टकरा गया। इसके बाद वह ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच फंसकर घिसटते हुए पटरी पर गिर गईं। बच्चे और पति ट्रेन रोकने के लिए ड्राइवर को आवाज लगाते रहे, लेकिन ट्रेन नहीं रुकी। गंभीर हालत में अंजू को अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। उस समय ट्रेन में ड्राइवर के अलावा कोई केयरटेकर नहीं था, जिससे यह हादसा हो गया। इसके बाद टॉय ट्रेन को बंद कर दिया गया।
2022 में ट्रेन बंद होने के बाद चिड़ियाघर और वन विभाग की सिफारिश पर एचबीटीयू ने सुरक्षा जांच की। जांच में ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर लगे पोल को असुरक्षित बताया गया। साथ ही पटरियों की लेवलिंग पर भी सवाल उठाए गए।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बच्चों की सुरक्षा के लिए ट्रेन में ड्राइवर के अलावा एक कर्मचारी की तैनाती जरूरी है। इसके बाद शासन ने कमियों को दूर करने के निर्देश देते हुए ट्रेन चलाने की अनुमति दे दी थी। लेकिन दो साल बाद भी चिड़ियाघर प्रशासन न तो खामियां दूर कर सका और न ही ट्रेन दोबारा शुरू हो पाई।
कानपुर चिड़ियाघर में जू ट्रेन करीब 1.4 किमी के दायरे में चलती है। इसमें एक इंजन और चार बोगियां हैं, जिनमें कुल 84 लोगों के बैठने की क्षमता है। 2014 से 2017 तक ट्रेन बैटरी इंजन से चली, जबकि 2017 से 2019 के बीच इसकी स्थिति खराब रही। साल 2021 में इसे सीएनजी इंजन से चलाया जाने लगा। नवंबर 2022 की घटना के बाद ट्रेन बंद कर दी गई।
वर्तमान में ट्रेन के ट्रैक की हालत खराब हो चुकी है। कई जगह पटरियों के नीचे से मिट्टी हट गई है, जिससे जमीन का लेवल बिगड़ गया है। पटरियों पर झाड़ियां उग आई हैं और प्लेटफॉर्म पर लगे पोल अब भी हटाए नहीं गए हैं। जिस स्थान पर यह हादसा हुआ था, वहां ट्रेन अब भी पटरी से उतरी हुई खड़ी है, जो चिड़ियाघर प्रशासन की लापरवाही को दिखाता है।
कानपुर चिड़ियाघर के डायरेक्टर कन्हैया पटेल ने बताया कि ट्रेन को जल्द शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अभी जगह- जगह पटरी और पुल क्षतिग्रस्त है। ट्रैक और ट्रेन की कई जांच करने के बाद टेंडर किया जाएगा। एचबीटीयू की टेक्निकल टीम से जांच करवाने के बाद तय मानक के अनुसार ट्रेन को शुरू किया जाएगा। इस बार पीछे एक गार्ड के बैठने की व्यवस्था की जाएगी। उम्मीद है कि टॉय ट्रेन को इस साल के अंत तक शुरू कर देंगे।






