March 28, 2026

संवाददाता 
कानपुर। 
हृदय रोग संस्थान के डॉक्टरों ने एक 12 साल की बच्ची का करीब 4 घंटे तक ऑपरेशन करके उसे नई जिंदगी दी है। फतेहपुर की रहने वाली लक्ष्मी पटेल के दिल के दाहिने हिस्से में टीबी की एक विशाल गांठ बन गई थी, जिसने खून के बहाव को लगभग रोक दिया था।कार्डियोलॉजी के निदेशक डॉ. राकेश वर्मा का दावा है कि इस तरह का यह दुनिया का पहला मामला है, जिसे अब इंटरनेशनल मेडिकल जर्नल्स में प्रकाशन के लिए भेजा जाएगा।
फतेहपुर के खंडदेवर की रहने वाली लक्ष्मी को 24 फरवरी को संस्थान के सीवीटीएस विभाग में भर्ती किया गया था। उस समय बच्ची की हालत बेहद गंभीर थी। उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी और पूरे शरीर के साथ-साथ पैरों में सूजन आ गई थी। जांच में पता चला कि दिल की धड़कन भी असामान्य है और हार्ट के आसपास पानी जमा है।
डॉक्टरों ने जब लक्ष्मी की टीटीई और टीईई की, तो रिपोर्ट देखकर सब हैरान रह गए। दिल के दाहिने हिस्से में 10×10 सेंटीमीटर की एक बड़ी गांठ मौजूद थी। यह गांठ दिल के वाल्व को पूरी तरह ढक चुकी थी, जिससे शरीर में खून का फ्लो सही ढंग से नहीं हो पा रहा था।
इसके साथ ही दिल के ऊपर की सुरक्षा झिल्ली पेरिकार्डियम भी सामान्य से कहीं ज्यादा मोटी होकर 1 सेंटीमीटर तक पहुंच गई थी। शुरुआत में इसे ट्यूमर माना जा रहा था।
मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए ऑपरेशन का फैसला लिया गया। डॉ. राकेश वर्मा के साथ डॉक्टरों ने टीम ने बच्ची को हार्ट-लंग मशीन पर लिया और दिल की धड़कन रोककर सर्जरी शुरू की।
सबसे पहले दिल के ऊपर जमी मोटी और सख्त झिल्ली को बड़ी धमनियों से अलग किया गया। इसके बाद दिल की दीवार खोलकर उस विशाल गांठ को बाहर निकाला गया। ऑपरेशन के बाद जब गांठ की बायोप्सी कराई गई, तो पता चला कि वह ट्यूमर नहीं बल्कि टीबी का संक्रमण था। 

कार्डियोलॉजी के निदेशक डॉ. राकेश वर्मा ने कहा- दिल के अंदर टीबी की इतनी बड़ी गांठ और साथ में झिल्ली का इतना मोटा होना बेहद दुर्लभ है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मेडिकल लिटरेचर देखा लेकिन अब तक ऐसा कोई दूसरा केस सामने नहीं आया है।
उन्होंने कहा- यह संस्थान के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। फिलहाल बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है और उसे जल्द ही अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।
इस जटिल सर्जरी को अंजाम देने वाली टीम में सर्जिकल विभाग से प्रो. राकेश वर्मा, डॉ. सौरभ, डॉ. प्रभात, डॉ. श्रीराज और डॉ. लक्ष्मण शामिल रहे। 

एनेस्थीसिया टीम में डॉ. चांदनी, डॉ. सूरज, डॉ. उर्वशी, डॉ. निशा और डॉ. दीक्षा ने सहयोग किया। वहीं, हार्ट-लंग मशीन का जिम्मा डॉ. मुबीन ने संभाला और नर्सिंग स्टाफ में सुनीता, वैशाली व अनुज शामिल रहे।