
संवाददाता
कानपुर। सरकार की ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन वेटलैंड’ योजना के तहत कानपुर के बिल्हौर तहसील स्थित जैसमो वेटलैंड की सूरत बदलने जा रही है। वन विभाग ने इसे बड़े वेटलैंड पार्क और इको-टूरिज्म स्पॉट के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की है।
लक्ष्य है कि इस प्राकृतिक धरोहर को राजस्थान के प्रसिद्ध भरतपुर पक्षी अभयारण्य की तर्ज पर विकसित किया जाएगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिल सके।
डीएफओ दिव्या ने बताया कि जैसमो वेटलैंड को टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने के लिए शासन से करीब एक करोड़ रुपए के बजट की मांग की गई है। नदी किनारे स्थित यह वेटलैंड बाढ़ नियंत्रण और जलवायु संतुलन में ‘किडनी’ की तरह काम करता है, जिसे अब आधुनिक सुविधाओं से संवारा जाएगा।
जैसमो वेटलैंड की सबसे बड़ी ताकत इसकी जैव-विविधता है। हालिया सर्वे में यहां करीब 150 प्रजातियों के पक्षी दर्ज किए गए हैं। उत्तर प्रदेश का राजकीय पक्षी सारस यहां आसानी से देखा जा सकता है। साथ ही व्हिसलिंग डक, स्नेक बर्ड और कॉर्मोरेंट जैसे पक्षियों की मौजूदगी भी इस क्षेत्र को खास बनाती है। प्रवासी पक्षियों के लिए मिट्टी के टीले और लकड़ी के स्टैंड तैयार किए जाएंगे, ताकि वे यहां सुरक्षित विश्राम कर सकें।
परियोजना के तहत वेटलैंड पार्क में एक बटरफ्लाई पार्क भी विकसित किया जाएगा। इसके लिए मिल्कवीड, लैंटाना, बटरफ्लाई बुश, गेंदा और सूरजमुखी जैसे पौधे लगाए जाएंगे, जो तितलियों के भोजन और प्रजनन के लिए अनुकूल होंगे। साथ ही यहाँ बर्ड वॉचिंग के शौकीनों के लिए विशेष सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे कानपुर समेत आसपास के जिलों से पर्यटक यहां आकर्षित होंगे।
डीएफओ दिव्या के मुताबिक, बजट मिलते ही काम तेज कर दिया जाएगा और 6 से 7 महीने में परियोजना पूरी करके जनता को समर्पित करने का लक्ष्य है। इस वेटलैंड पार्क के विकसित होने से स्थानीय युवाओं को गाइड, जलपान गृह और अन्य सेवाओं के जरिए रोजगार मिलेगा।
यह जैसमो वेटलैंड न सिर्फ कानपुर के लिए ‘फेफड़े’ की तरह काम करेगा, बल्कि प्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान भी बनाएगा।






