
संवाददाता
कानपुर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर में पूर्व छात्रों का सम्मेलन युटिलिटी प्रेक्षागृह में आयोजित हुआ।
इस सम्मेलन में लगभग 450 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में “जैविक खेती की संभावनाएं” विषय पर मुख्य अतिथि का व्याख्यान हुआ। जिसमें पूर्व छात्रों ने अपने विचार भी साझा किए।
सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में पदमश्री डॉ. आर सी चौधरी ने शिरकत की। उन्होंने कहा कि पूर्व छात्र और वर्तमान छात्रों को मिलकर अनुभव साझा करने चाहिए। जिससे संगठन और विश्वविद्यालय दोनों को मजबूती मिलेगी।
डॉ. चौधरी ने कृषि क्षेत्र की चुनौतियों से निपटने के लिए शिक्षा, अनुसंधान और प्रसार के बीच सशक्त समन्वय पर जोर दिया।
सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. एस के सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। सम्मेलन के महासचिव डॉ. मुनीश कुमार ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि संस्थान ने हमेशा देश की कृषि उन्नति में योगदान दिया है। डॉ. कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किसानों के हित में उत्कृष्ट कार्य किए हैं। उन्होंने भावी पीढ़ियों के लिए सतत खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाने का आह्वान किया।
विशिष्ट अतिथि भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान कानपुर के पूर्व निदेशक डॉ. मसूद अली ने कहा कि पहले दलहन का उत्पादन वर्ष 2000 में 140 लाख टन था जो अब बढ़कर लगभग 250 लाख टन हो गया है। उन्होंने कहा कि दालें हमारे स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभकारी हैं क्योंकि इनमें प्रोटीन 18 से 22% होती है। साथ ही खेतों में दलहन उगाने से मृदा की सेहत में सुधार होता है।
इस अवसर पर एल्युमिनाई डायरेक्टरी का विमोचन भी किया गया।
आईआईएफएसआर मेरठ के निदेशक डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि यह संस्थान न केवल एक शिक्षा केंद्र रहा है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण की प्रयोगशाला भी रहा है। यहाँ से निकले छात्र-छात्राए आज देश-विदेश में कृषि सुधार, जलवायु अनुकूलन, सतत विकास, और ग्रामीण इनोवेशन के क्षेत्रों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
कार्यक्रम में अन्य अतिथियों ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए। बीज एवं प्रक्षेत्र के निदेशक डा. विजय कुमार यादव ने आए हुए सभी अतिथियों को धन्यवाद दिया।
इस अवसर पर डॉ. राम सकल सिंह, डॉ. सुरेश कुमार सहित दूर दराज से आए पुरातन छात्रो सहित विश्वविद्यालय के निदेशक, अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, प्रोफेसर सहित सौ से अधिक लोग उपस्थित रहे।






