January 30, 2026

संवाददाता
कानपुर। 
एलपीएस कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट आज देश के चिकित्सा मानचित्र पर नई पहचान बना रहा है। संस्थान के हृदय रोग विशेषज्ञों ने दिल के वाल्व के इलाज की एक ऐसी उन्नत तकनीक विकसित की है, जिसमें बिना बड़े ऑपरेशन और चीर-फाड़ के मरीजों को नया जीवन मिल रहा है। इस आधुनिक पद्धति को ट्रांसजुगुलर बलून मिट्रल वाल्वुलोटोमी नाम दिया गया है, जिसने पारंपरिक सर्जरी से जुड़े डर, दर्द और जोखिम को काफी हद तक खत्म कर दिया है।
आमतौर पर दिल का वाल्व सिकुड़ने पर जांघ की नस के रास्ते बैलून डालकर इलाज किया जाता है, लेकिन एलपीएस के कार्डियोलॉजी विभाग ने इससे आगे बढ़ते हुए गर्दन की नस से हृदय तक पहुंचने की तकनीक अपनाई है। यह रास्ता छोटा और अधिक सीधा होने के कारण डॉक्टरों को वाल्व तक सटीक पहुंच देता है। इस प्रक्रिया में न तो ज्यादा रक्तस्राव होता है और न ही मरीज को लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता है, जिससे रिकवरी तेज हो जाती है।
यह तकनीक खासतौर पर उन मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जिनकी जांघ की नसें जन्मजात पतली होती हैं या उनमें रुकावट होती है। इसके अलावा गर्भवती महिलाएं, रीढ़ की हड्डी में टेढ़ापन (काइफोस्कोलियोसिस) झेल रहे मरीज और गंभीर हृदय रोगियों के लिए भी यह सबसे सुरक्षित विकल्प साबित हो रही है। जहां पारंपरिक पद्धतियां जोखिम भरी हो जाती हैं, वहां गर्दन की नस से किया जाने वाला यह उपचार सुरक्षित और प्रभावी समाधान देता है।
हृदय रोग संस्थान के प्रो. डॉ. एसके सिन्हा के नेतृत्व में बीते दो वर्षों में 50 से अधिक मरीजों का इस तकनीक से सफल इलाज किया जा चुका है। इस उपलब्धि को अंतरराष्ट्रीय मान्यता भी मिली है। वर्ष 2025 में प्रतिष्ठित जर्नल ऑफ अमेरिकन कार्डियोलॉजी ने इस तकनीक पर आधारित शोध प्रकाशित करके कानपुर की इस विशेषज्ञता पर अपनी मुहर लगाई है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में यह सुविधा केवल एलपीएस कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट में उपलब्ध है, जबकि देशभर में सिर्फ चार-पांच शहरों में ही यह तकनीक अपनाई जा सकी है।
इस तकनीक की खासियत यह भी है कि मरीज प्रक्रिया के कुछ ही घंटों बाद चलने-फिरने लगता है। गर्दन पर मामूली हस्तक्षेप होने के कारण दर्द और जटिलताएं बेहद कम होती हैं। इतना ही नहीं, इस पद्धति से एक साथ दिल के दो वाल्व- मिट्रल और ट्राइकसपिड का इलाज भी संभव है। कम समय, कम जोखिम और तेज रिकवरी के चलते ट्रांसजुगुलर बलून मिट्रल वाल्वुलोटोमी तकनीक को आज चिकित्सा विज्ञान की एक बड़ी उपलब्धि और ‘मास्टरपीस’ माना जा रहा है।