January 23, 2026

संवाददाता
कानपुर।
सोने और चांदी के लगातार बढ़ते दामों ने शहर के थोक सर्राफा बाजार चौक और नयागंज की रौनक छीन ली है। कभी गहनों की खनक और मशीनों की आवाज से गुलजार रहने वाला यह बाजार इन दिनों सन्नाटे में डूबा हुआ है। महंगे भाव के कारण न तो थोक कारोबारियों को अपेक्षित ऑर्डर मिल रहे हैं और न ही कारीगरों के पास काम बचा है।
हालात यह हैं कि कई कारीगर अपनी जमा पूंजी से घर-परिवार चला रहे हैं और अगर यही स्थिति बनी रही तो भुखमरी की नौबत आ सकती है। दुकानों में नोटों को गिनने वाली मशीनें इन दिनों ठप पड़ी हैं। पल पल बढ़ रहे दामों की वजह से थोक कारोबारियों के सामने स्टाक मेंटेन रख पाना चुनौती है। 
सर्राफा बाजार में काम करने वाले सोना-चांदी के कारीगरों का कहना है कि पहले जहां रोजाना काम मिलता था, अब हफ्तों तक ऑर्डर नहीं आ रहे। सोने की डाई काटने वाले कारखानों में दिनभर चलने वाली मशीनें ठप पड़ी हैं। गलाई वाले स्थानों में भट्‌ठी ठंडी पड़ी है। कारखानों में सिर्फ कारीगर आ रहे हैं और शाम को बिना काम के वापस लौट रहे हैं।
तैयारी का काम करने वाले कारीगर नितिन बताते हैं कि एक ग्राम का भी काम नहीं हो रहा है। हम लगभग 100 ग्राम सोने का काम एक हफ्ते में करते थे। अब वह महीनों में नहीं हो पा रहा है। कारीगरों का कहना है कि वेतन या मजदूरी न मिलने के कारण बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। जो बचाकर रखा है, उसी से खर्च चल रहा है। देखते हैं कि कब तक चलता है।
सोने व चांदी के थोक कारोबारियों की परेशानी भी कम नहीं है। चांदी के थोक कारोबारी हर्षित सिंह का कहना है कि पूरे दिन दाम घटते व बढ़ते रहते हैं। आजकल ऐसा हो रहा है कि दिन में जो माल वे बेचते हैं, शाम को स्टॉक पूरा करने के लिए जब बाजार से दोबारा खरीदारी करने जाते हैं तो भाव और बढ़ चुका होता है। इससे उन्हें सीधा घाटा उठाना पड़ रहा है। कई कारोबारी जोखिम से बचने के लिए सीमित मात्रा में ही माल रख रहे हैं, जिससे कारोबार और सिकुड़ गया है। अपना स्टाक मेंटेन रख पाना उनके लिए चैलेंज बन गया है।
आल इंडिया ज्वैलर्स एंड मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन के जिला महामंत्री अर्पित सिंह बताते हैं कि भाव बढ़ने से 20 से 25 परसेंट ही काम बचा रह गया है। 18 व 22 कैरेट के आर्डर न के बराबर आ रहे हैं। अब तो लोग 14 कैरेट व नौ कैरेट में ज्वैलरी बनवाने के लिए आ रहे हैं। सहालगी सीजन के बावजूद बाजार में मांग कमजोर बनी हुई है। आमतौर पर इस समय शादियों के चलते सोने-चांदी की खरीदारी तेज रहती थी, लेकिन इस बार हालात उलट हैं। शादी वाले घरों में लोग नए जेवर बनवाने के बजाय पुराने जेवरात को ही चढ़ा रहे हैं। सर्राफा व्यापारियों के अनुसार, पहले जहां 100 ग्राम सोने का चढ़ावा बनवाने की मांग होती थी, अब ग्राहक महज 20 से 25 ग्राम में ही पूरे जेवर तैयार करवा रहे हैं। डिजाइन हल्के और वजन कम रखने पर जोर दिया जा रहा है।
सर्राफा कारोबार से जुड़े संजय वर्मा ने बताया कि अगर सोने-चांदी के भाव में जल्द स्थिरता नहीं आई तो हालात और बिगड़ सकते हैं। इसका सीधा असर कारीगरों, छोटे दुकानदारों और उनसे जुड़े हजारों परिवारों पर पड़ेगा। कारोबारियों ने उम्मीद जताई है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में नरमी और घरेलू मांग बढ़ने से आने वाले दिनों में हालात कुछ सुधर सकते हैं, लेकिन फिलहाल कानपुर का थोक सर्राफा बाजार मुश्किल दौर से गुजर रहा है।
डाई कटिंग का कारखाना चलाने वाले संतोष कुमार वर्मा बताते हैं कि काम ठप पड़ा हुआ है। भाव चढ़ने से काम बंद है। पहले काम चलता था। इस समय बिल्कुल भी काम नहीं है। हमारे कारीगर भुखमरी की कगार पर हैं।
चांदी के कारोबारी गणेश सोनी कहते हैं कि व्यापार नहीं बचा है। सुबह से आ जाओ और शाम तक बैठे रहो बस। इतना ही कारोबार बचा है। एक समय ऐसा था कि नोट गिनने की मशीन लगाई थी। अब जीरो पर बैठे हैं। काम नहीं है।
सोने के थोक कारोबारी मनोज वर्मा बताते हैं कि बीते साल मई के बाद से व्यापार की स्थिति खराब है। भाव की तेजी से कारोबार 95 प्रतिशत कम हो गया है। सुबह से दुकान आया हूं, दो घंटे में सोना चार हजार व चांदी 10 हजार बढ़ गया है। दिन भर में हम जितना भी माल सेल करते हैं। जब शाम के समय उसको खरीदने जाते हैं तो दाम बढ़ा मिलता है। हर घंटे घाटा खड़ा है।