January 23, 2026

संवाददाता

कानपुर। आईआईटी कानपुर के शोधकर्ताओं ने अंतरिक्ष उपग्रहों से प्राप्त 30 वर्षों के सतही प्रेक्षणीय आंकड़ों को एक त्रि-आयामी संगणकीय मॉडल में संयोजित कर पहली बार सूर्य के भीतर मौजूद चुंबकीय क्षेत्र का मानचित्रण किया है। यह अध्ययन तीन दशकों की अवधि में सूर्य के भीतर चुंबकीय क्षेत्रों की तीव्रता, संरचना और विकास का एक अद्वितीय आकलन प्रस्तुत करता है, जो यह समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है कि हमारा सूर्य किस प्रकार अंतरिक्ष मौसम को संचालित करता है, जो उपग्रहों, रेडियो संचार, नेविगेशन प्रणालियों और तकनीकी परिसंपत्तियों को बाधित कर सकता है।

सौर चुंबकीय गतिविधि को समझना उन अंतरिक्ष-मौसम घटनाओं की व्याख्या और पूर्वानुमान के लिए आवश्यक है, जो पृथ्वी पर उपग्रहों, विद्युत ग्रिड, नेविगेशन और संचार प्रणालियों को प्रभावित कर सकती हैं। यह गतिविधि स्थिर नहीं रहती, बल्कि यह लगभग हर 11 वर्षों में बढ़ती और घटती है, एक नियमित चुंबकीय चक्र का अनुसरण करते हुए, जो सौर कलंको और सौर विस्फोटों की उपस्थिति को नियंत्रित करता है।

यही चक्र सनस्पॉट्स और सौर विस्फोटों की उपस्थिति को संचालित करता है। इस चक्रीय व्यवहार के पीछे का भौतिक तंत्र ‘सौर डायनमो’ है—एक ऐसी प्रक्रिया जिसके माध्यम से सूर्य अपने गहरे आंतरिक भाग में चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है। चूंकि यह क्षेत्र सूर्य की सतह के नीचे छिपा रहता है, इसलिए वैज्ञानिक इसे प्रत्यक्ष रूप से नहीं देख सकते।

हालांकि, आधुनिक उपकरण सूर्य की सतह के चुंबकीय क्षेत्र को अभूतपूर्व विस्तार से माप सकते हैं, लेकिन सूर्य के आंतरिक भाग तक सीधे पहुंच न होने के कारण लंबे समय से वहां मौजूद चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता और व्यवहार का अनुमान लगाने में सीमाएं रही। सूर्य के भीतर मौजूद चुंबकीय क्षेत्र का विश्वसनीय आकलन उपलब्ध न होना, सौर डायनमो की कार्यप्रणाली से जुड़े सिद्धांतों की जांच और उन्हें परिष्कृत करने में एक प्रमुख बाधा रहा है।

आईआईटी कानपुर के भौतिकी विभाग के पीएचडी छात्र सौम्यदीप चटर्जी और उनके प्रो. गोपाल हज़रा के साथ हाल ही में एक अध्ययन द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में प्रकाशित किया है जो इस चुनौती को संबोधित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। शोधकर्ताओं ने एक त्रि-आयामी डायनमो मॉडल विकसित किया, जो तीन दशकों तक के सौर सतह चुंबकीय क्षेत्र के दीर्घकालिक प्रेक्षणीय आंकड़ों को आत्मसात करता है।

30 वर्षों के सतही चुंबकीय क्षेत्र के आंकड़ों को एक 3डी संगणकीय मॉडल में जोड़कर, अध्ययन यह जांच करता है कि बड़े पैमाने पर औसत चुंबकीय पैटर्न समय के साथ कैसे विकसित होते हैं और सूर्य के भीतर पूरे त्रि-आयामी चुंबकीय क्षेत्र का मानचित्रण करता है। इस पद्धति के पीछे यह विचार है कि यदि सूर्य के गहरे भीतर मौजूद चुंबकीय क्षेत्र सतह की चुंबकीय संरचना को आकार देने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं, तो उनके संकेत लंबे समय तक एकत्र किए गए सतही अवलोकनों में जरूर दिखाई देंगे।

इस दृष्टिकोण की एक प्रमुख विशेषता यह है कि यह पूरी तरह सैद्धांतिक सिमुलेशनों के बजाय प्रेक्षणीय आंकड़ों पर दृढ़ता से आधारित है। वास्तविक डेटा से जुड़े होने के कारण, शोधकर्ता सूर्य की सतह के नीचे मौजूद चुंबकीय क्षेत्रों की तीव्रता, संरचना और विकास पर सार्थक सीमाएं निर्धारित करने में सक्षम हुए हैं। इस मॉडल का सत्यापन सौर ध्रुवीय चुंबकीय क्षेत्र के अवलोकनों के माध्यम से किया गया है—यह ध्रुवों के पास फैला हुआ एक चुंबकीय क्षेत्र है, जिसे अगले सौर चक्र की तीव्रता का एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।

शोधकर्ताओं का यह भी सुझाव है कि उनका यह दृष्टिकोण अगले सौर चक्र के शिखर का पूर्वानुमान लगाने के लिए अत्यंत मजबूत है और सौर चक्र के अन्य किसी भी पूर्वानुमान मॉडल की तुलना में अधिक यथार्थवादी है। यह अध्ययन यह भी दर्शाता है कि बड़े पैमाने के प्रेक्षणीय आंकड़ों के साथ संगणकीय मॉडल का संयोजन इस क्षेत्र का भविष्य है। साथ ही, यह अंतरिक्ष मिशनों और प्रौद्योगिकियों को सौर गतिविधि से सुरक्षित रखने के लिए दीर्घकालिक योजना बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।