संवाददाता
कानपुर। उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) में रणजी ट्रॉफी के लिए खिलाड़ियों की चयन प्रक्रिया एक बार फिर विवादों में घिर गई है। पिछले कई वर्षों से चर्चा में रहे हरियाणा के तथाकथित “सुपर एजेंट” खिलाड़ी को इस बार रायबरेली से पंजीकरण कराकर टीम में शामिल किया गया है। इस चयन को लेकर क्रिकेट गलियारों में गंभीर सवाल उठ रहे हैं। वहीं संघ के सर्वे सर्वा के रूप में पहचाने जाने वाले शख्स ने पहले तो चयनकर्ताओं से एक पदाधिकारी के पुत्र का टीम में चयन करवाया फिर मीडिया में उनपर अपने पद का दुरुपयोग करने वाली बात उजागर कर दिया । बताते चलें कि रणजी ट्रॉफी के दो मैचों के लिए यूपीसीए के चयनकर्ताओं ने इस बार 21 सदस्यीय टीम का ऐलान करके भी सबको चौंका दिया है।क्रिकेट जानकारों के अनुसार, 15 सदस्यीय मुख्य टीम के बाद चयनित खिलाड़ी अक्सर ‘जुगाड़’ के आधार पर शामिल किए जाते हैं। इन खिलाड़ियों का सीजन के लिए कोटा तय होता है, चाहे उन्हें एक मैच खेलना हो या दो। सूची में उनका क्रम कोई मायने नहीं रखता, बस ऊपरी पहुंच होनी चाहिए। मौजूदा यूपीसीए सूची इसका उदाहरण मानी जा रही है। सैय्यद मुश्ताक अली ट्रॉफी में चार साल पहले बेहद साधारण प्रदर्शन करने वाले एक पदाधिकारी के पुत्र का चयन भी इसी कड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है।एक समय था जब रणजी टीम में जगह बनाना बेहद कठिन होता था। चयनकर्ताओं को एक-दो बदलाव के लिए भी लंबी माथापच्ची करनी पड़ती थी। मोहम्मद कैफ, सुरेश रैना, आरपी सिंह, गोपाल शर्मा और ज्ञानेन्द्र पांडेय जैसे खिलाड़ियों को लगातार मौके मिलते थे। लेकिन पिछले 5-7 वर्षों में ‘जुगाड़ संस्कृति’ के बढ़ते प्रभाव ने वास्तविक टैलेंट को हाशिये पर धकेल दिया है। अपवाद स्वरूप कुलदीप यादव और रिंकू सिंह जैसे खिलाड़ी ही इस सिस्टम को तोड़ पाए।इस सीजन यूपी ने अब तक 5 रणजी मुकाबलों में 56 खिलाड़ियों को आजमाया है, जो देश में सबसे अधिक है। तुलना करें तो विदर्भ ने 50, झारखंड ने 44 और आंध्र प्रदेश ने 34 खिलाड़ियों को मौका दिया। इसके बावजूद यूपी टीम 17 अंकों के साथ ग्रुप बी में चौथे स्थान पर है और नॉकआउट में पहुंचने की उम्मीदें कमजोर हो चुकी हैं। पहले 20-22 खिलाड़ी पूरे सीजन खेलते थे और टीम आसानी से अगले दौर में पहुंच जाती थी।22 जनवरी से लखनऊ के इकाना स्टेडियम में शुरू हो रहे दूसरे चरण से पहले कप्तान करन शर्मा को टीम से बाहर कर दिया गया है और उनकी जगह आर्यन जुयाल को जिम्मेदारी सौंपी गई है। हैरानी की बात यह है कि करन शर्मा को 21 सदस्यीय सूची में भी शामिल नहीं किया गया। वहीं समीर रिज़वी, मोहसिन खान और आकिब खान जैसे खिलाड़ी भी टीम से बाहर हैं। भुवनेश्वर कुमार की अनुपस्थिति को लेकर भी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। यूपीसीए के एक पूर्व चयनकर्ता ने बताया कि इस तरह से किया जा रहा यूपी क्रिकेट का चयन तंत्र आज भी सवालों के घेरे में है। खिलाड़ियों को एक-दो मैच खिलाकर आईपीएल पात्रता दिलाने का यह ‘मैजिक व्हील’ सिस्टम प्रदेश क्रिकेट के भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है।





