
संवाददाता
कानपुर। कभी हार्ट अटैक को बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब यह खतरा युवाओं तक तेजी से पहुंच चुका है। पिछले करीब छह महीनों में कानपुर और आसपास के इलाकों में कम उम्र के हार्ट अटैक के मामलों में साफ इजाफा देखा गया है।
अनुमान के मुताबिक, इन छह महीनों में अस्पतालों में आने वाले हार्ट अटैक के कुल मामलों में करीब 25 से 30 प्रतिशत मरीज 25 से 40 वर्ष की उम्र के रहे हैं। यह आंकड़ा अपने आप में चिंता बढ़ाने वाला है।
कानपुर के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ और कार्डियोलॉजी निदेशक डॉ. राकेश वर्मा ने बताया कि युवाओं में हार्ट अटैक बढ़ने की सबसे बड़ी वजह अनियमित जीवनशैली, लगातार तनाव और नशे की बढ़ती आदतें हैं। पहले जहां ऐसे मामले कभी-कभार सामने आते थे, वहीं अब लगभग हर हफ्ते कम उम्र के मरीज दिल की गंभीर समस्या लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं।
डॉ. राकेश वर्मा ने बताया कि, आज का युवा लगातार मानसिक दबाव में जी रहा है। पढ़ाई, नौकरी, करियर और आर्थिक जिम्मेदारियों के कारण तनाव आम हो गया है। देर रात तक मोबाइल और सोशल मीडिया पर समय बिताने से नींद पूरी नहीं हो पाती।
अनुमान है कि शहर के करीब 60 प्रतिशत युवा रोज़ाना छह घंटे से भी कम नींद ले रहे हैं। नींद की यह कमी सीधे दिल की सेहत पर असर डालती है। अनियमित खानपान और लंबे समय तक बैठे रहने की आदत से ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं कम उम्र में ही बढ़ने लगती हैं।
पिछले छह महीनों में सामने आए मामलों में यह भी देखा गया है कि करीब आधे से ज्यादा युवा मरीज किसी न किसी रूप में नशे या स्मोकिंग की आदत से जुड़े रहे। सिगरेट, तंबाकू और शराब को तनाव से राहत का जरिया समझा जा रहा है, लेकिन यही आदतें दिल की धमनियों को नुकसान पहुंचा रही हैं।
स्मोकिंग से शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा घटती है और धमनियां सिकुड़ने लगती हैं। शराब और अन्य नशे ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट को असंतुलित कर देते हैं। जब तनाव और नशा साथ मिलते हैं, तो हार्ट अटैक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
डॉ. राकेश वर्मा बताते हैं, कि आज के युवाओं में फिजिकल एक्टिविटी लगभग खत्म होती जा रही है। ऑफिस का काम, मोबाइल और स्क्रीन के सामने लंबा समय बिताने के कारण शरीर सक्रिय नहीं रह पाता। अनुमान के अनुसार करीब 70 प्रतिशत युवा नियमित वॉक या एक्सरसाइज नहीं करते। इसका असर धीरे-धीरे दिल की मांसपेशियों पर पड़ता है और दिल कमजोर होने लगता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यही हाल रहा तो आने वाले समय में कम उम्र में हार्ट अटैक के मामले और तेजी से बढ़ सकते हैं। पर्याप्त नींद लेना, तनाव को कम करना, नशे और स्मोकिंग से दूरी बनाना, मोबाइल का सीमित इस्तेमाल और रोज़ाना हल्की एक्सरसाइज अपनाकर इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
पिछले छह महीनों के आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि युवाओं को अब अपनी सेहत को लेकर गंभीर होने की जरूरत है, क्योंकि दिल की बीमारी अब उम्र नहीं देख रही।मामलों में साफ इजाफा देखा गया है।






