
संवाददाता
कानपुर। नगर निगम में चल रहा मेयर और पार्षदों का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रभारी मंत्री ने कानपुर आकर इस विवाद को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन दो बार लगातार बातचीत होने के बाद भी इस विवाद का हल नहीं निकल सका ।
भाजपा के नाराज पार्षद अब नगर निगम में भ्रष्टाचार की फाइल लेकर लखनऊ जाने की तैयारी कर चुके हैं। पार्षदों को डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने लखनऊ बुलाया था। अब उन्हें डिप्टी सीएम कार्यालय से मुलाकात का समय भी मिल चुका है। सभी पार्षद 11 जनवरी को लखनऊ जाएंगे।
उप्र सरकार के कैबिनेट मंत्री व कानपुर के प्रभारी मंत्री योगेंद्र उपाध्याय दो बार पार्षदों और मेयर के बीच समझौते के लिए वार्ता करा चुके हैं। प्रभारी मंत्री ने सर्किट हाउस में दोनों पक्षों को बुलाया था और लगभग 5 घंटे तक वार्ता चलती रही थी।
पार्षदों को आश्वासन दिया गया था कि उनकी मांगों को पूरा किया जाएगा। लेकिन मंत्री इस विवाद को पूरी तरह से शांत नहीं करा पाए। अब पार्षद डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से मिलने के लिए लखनऊ जाएंगे। पार्षदों का कहना है कि वह नगर निगम के भ्रष्टाचार के सारे साक्ष्य अपने साथ लेकर जाएंगे।
प्रभारी मंत्री ने जब सर्किट हाउस में मीटिंग की तो यहां पर मेयर, पार्षदों के साथ भाजपा के पदाधिकारियों को बुलाया था। लेकिन इसमें मेयर प्रमिला पांडेय के पुत्र बंटी पांडेय भी पहुंचे थे। उनके पहुंचने पर भी पार्षदों ने सवालिया निशान लगाए हैं। पार्षदों का कहना है कि संगठन की बैठक में मेयर पुत्र का क्या काम था।
पार्षद पवन गुप्ता ने बताया कि मेयर के पुत्र लगातार उन्हें धमका रहे हैं। जब वह प्रभारी मंत्री की बैठक में सर्किट हाउस पहुंचे थे, तो वहां पर मेयर पुत्र भी मौजूद थे। बैठक में भी बंटी पांडेय ने उन्हें धमकाया और अपशब्दों का प्रयोग किया। प्रभारी मंत्री के पीएसओ ने बीच बचाव कराया था। इसकी शिकायत उन्होंने प्रभारी मंत्री से की है।
कानपुर में 26 दिसंबर को नगर निगम का सदन हुआ था। यहां पर पार्षद पवन गुप्ता और पार्षद अंकित मौर्य अपनी बात रखना चाहते थे। मेयर ने उन्हें बोलने के लिए समय देने की बात कही थी, लेकिन दोनों के समय में अन्य पार्षद बोलने लगे थे। जिसके बाद हंगामा शुरू हो गया था।
हंगामे के बीच सदन को खत्म कर दिया गया था और पार्षद अपने वार्ड की समस्या नहीं रख पाए थे। इसके बाद शाम को मेयर ने दोनों पार्षदों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें आगामी 4 सदन के लिए सस्पेंड कर दिया था। इसके बाद से ही लगातार विवाद चल रहा है और पार्षदों ने मेयर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्षदों का आरोप है कि मेयर ने अपने बेटे के कहने पर उन्हें सस्पेंड किया था।





