—महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी के लिए गए एकतरफा फैसले से क्रिकेट तंत्र हिला

संवाददाता
कानपुर। कानपुर क्रिकेट एसोसिएशन में प्रशासनिक अधिकारी के मनमानी रवैये के आरोपों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है। जूनियर स्तर के क्रिकेटरों को छोड सीनियर खिलाड़ियों पर कथित तौर पर जबरन अनुशासनात्मक कार्रवाई के बाद अब अंपायर्स और स्कोरर्स को भी “नायाब तरीके” से बैन करने का मामला प्रकाश में आया है।
महाप्रबंधक के इस फैसले ने क्रिकेट के संचालन ढांचे पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं जिससे ये प्रतीत होता है कि केसीए में क्रिकेट के नियमों से ऊपर कोई एक पद हो गया है?सूत्रों के मुताबिक, बीते 2 माह पूर्व केसीए के कुछ प्रतिष्ठित अंपायर्स और स्कोरर्स ने खेल के किसी मैदान में व्यक्तिगत तौर पर प्रतियोगिता संपन्न कराए जाने पर सहमति जता दी ।बस यही बात महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी की नागवार गुजरी और लगभग 10से भी अधिक अंपायर्स और स्कोरर्स को खेल की गतिविधियों में शामिल होने पर बैन लगा दिया ।
यही नहीं महाप्रबंधक ने उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन और उत्तर प्रदेश वेटरन क्रिकेट एसोसिएशन को पत्र भेज कर भी उनसे सेवाएं लेने के लिए साफ तौर पर प्रतिबंध लगाने की गुहार लगा दी। निर्णय में समीक्षा की पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने के बजाय आंतरिक नोटशीट, मौखिक निर्देश और अचानक जारी किए गए पत्रों के जरिए अंपायर्स और स्कोरर्स को प्रतियोगिताओं से बाहर कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि न तो स्पष्ट आरोप बताए गए, न ही जवाब देने का अवसर दिया गया। यहां तक कि जिस संस्था यूपीवीसीए का केसीए से लेना देना तक नही उसके पदाधिकारियों को भी जबरन दबाव में लेकर उनको वेटरन क्रिकेट के मैच में अम्पायरिंग और स्कोरिंग करवाने के लिए प्रतिबन्धित करवाने का काम किया।
कानपुर क्रिकेट एसोसिएशन से प्रतिबन्धित व महाप्रबन्धक के हठधर्मी रवैये से आक्रोशित अम्पायर्स व स्कोरर्स में एक सदस्य ने बताया कि बीते अक्टूबर महीने में आईआईटी जैसी बडी संस्था ने मैच आयोजित करवाए जिसपर उन्होंने अपने करीबी अम्पायर्स से टीम लगवाने की बात कही,जिसपर उस सदस्य ने केसीए के महाप्रबन्धक और अध्यक्ष से फोन पर टीम को नियुक्त करवाने का आग्रह किया लेकिन सीधे तौर पर आईआईटी से मेल न आने पर केसीए की ओर से मैच आफिशियल्स को भेजने से मना कर दिया। तब उस टीम के सदस्यों ने निजी तौर पर मैच आफिशियल्स कर भूमिका निभायी और मैच सम्पन्न करवाए। ये बात केसीए के महाप्रबन्धक को नगवार गुजरी और उस टीम के सभी सदस्यों को केसीए के जुडे सभी मैचों के लिए प्रतिबन्धित कर दिया। महाप्रबन्धंक के इस रवैये से नाराज टीम ने एसोसिएशन के अध्यक्ष व चेयरमैन से गुहार लगायी लेकिन उन्होंने भी इसपर किसी प्रकार के हस्तक्षेप करने से गुरेज किया।अब तीन महीनों के बाद भी टीम के सदस्य मैच आफिशियल्स की भूमिका निभाने के लिए मैदानों में नही सडकों पर घूमते दिखायी दे रहें हैं। टीम के सदस्यों की माने तो अगर शीघ्र ही उनकी समस्याओं का निराकरण नही किया गया तो वह आन्दोलन करने को भी मजबूर हो सकते हैं। खेल के निष्पक्ष संचालन की रीढ़ माने जाने वाले अंपायर्स और स्कोरर्स को एक झटके में दरकिनार करना क्रिकेट प्रशासन के मूल सिद्धांतों पर चोट माना जा रहा है।





