April 6, 2025

आ स. संवाददाता 
कानपुर।
  विदेश में अच्छे पैकेज के साथ नौकरी दिलाने के नाम पर ठगने वाले गिरोह में शामिल युवतियां खुद नौकरी की तलाश में थी। मगर समय के साथ खुद साइबर ठग बन बैठी। जब चारों आरोपी पकड़े गए तब पूछताछ में युवतियों ने इसका खुलासा किया।
डीसीपी क्राइम के मुताबिक इस गिरोह में 15 और सदस्य है जिनकी तलाश में टीमों को लगाया गया है। सम्भव है कि इसमें कुछ युवतियां और हो सकती है। पुलिस ने चारों आरोपियों को जेल भेज दिया है।
पंजाब के विकास को विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने के मामले में क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने हरिओम पाण्डेय, अनुराग दीक्षित, अरीबा अंसारी और कीर्ति गुप्ता उर्फ स्नेहा को गिरफ्तार किया था।
पुलिस को इस मामले में गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश भी है। जिसके लिए टीमें गठित की गई है। वहीं पुलिस ने जब आरोपियों से पूछताछ की तो चौकाने वाले तथ्य सामने निकलकर आए।
क्राइम ब्रांच अफसर के मुताबिक अरीबा और कीर्ति लगभग डेढ़ साल पहले नौकरी डॉट कॉम पर हरिओम पाण्डेय के सम्पर्क में आई थी। उसने खुद की एक कम्पनी की फर्जी वेबसाइट बनवाकर नौकरी डॉट कॉम में इम्प्लॉयर केटेगरी में पंजीकृत करा रखा था।
अरीबा और कीर्ति ने नौकरी के लिए अपना रिज्यूम हरिओम की फर्जी वेबसाइट पर एचआर को भेज दी थी। दोनों का प्रोफाइल देखने के बाद हरिओम पाण्डेय ने उन्हें नौकरी दे दी थी। दोनों को तीस हजार रुपए प्रति माह के वेतन पर रखा गया था। उन्हें हरिओम ने जानकारी दी थी टेलीकॉलिंग का काम करना है।
पुलिस के मुताबिक दो माह बाद ही दोनों को पता चल गया था किसी को विदेश में नौकरी नहीं मिल रही बल्कि फर्जी दस्तावेजों और खुद ही विदेश की कम्पनी बनकर लोगों को नौकरी का झांसा देकर उनसे ठगी करी जा रही हैं।
इसके बाद भी दोनों युवतियां हरिओम पाण्डेय के साथ जुड़ी रही और काम करती रही। बाद में दोनों हरिओम की सबसे तेज इम्प्लॉई बन गई और हरिओम ने हर ठगी में दोनों का कमीशन भी तय कर दिया। जिसके बाद दोनों युवतियों ने इसी काम को आगे बढ़ाने का निर्णय ले लिया।
क्राइम ब्रांच के मुताबिक इस मामले में हरिओम का एक पार्टनर भी है। जिसकी तलाश पुलिस कर रही है। यह फर्जी केवाईसी गिरोह को उपलब्ध कराता था जिसके जरिए सिम कार्ड लिए जाते थे। इन्हीं कार्ड को फर्जी खाते में लिंक कर उसे मंगवाया जाता था। पुलिस को यह भी पता चला है कि हरिओम टेलीग्राम के जरिए बैंक खातों का इंतजाम कर लेता था।
पंजाब के विकास से जिस नम्बर से आरोपी सम्पर्क में थे वो बंदायूं के एक युवक का निकला। पुलिस ने जब उससे सम्पर्क किया तो पता चला कि उसने थाने में मोबाइल गुम होने की तहरीर दी थी। तीन से चार कम्पनियों में इसी तरह से फर्जी नम्बर पंजीकृत थे और उन्हीं में पैसे मंगाए जाते थे।
क्राइम ब्रांच ने युवतियों से पूछा कि उन्होंने कितने लोगों से ठगी को अंजाम दिया है। इसपर वो बोली कि उन्हें गिनती याद नहीं है। उन्हें जो हरिओम करने को कहता था वो लोग वही करती थी।