April 26, 2026

—लखनऊ यूनिवर्सिटी ने हासिल किया दूसरा स्थान।

आ स. संवाददाता 

कानपुर। सीएसजेएमयू में आयोजित चतुर्थ एआईयू मूट कोर्ट प्रतियोगिता के फाइनल मुक़ाबले के बाद चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी चैंपियन बनी है। जबकि दूसरे स्थान लखनऊ यूनिवर्सिटी की टीम रही। 

समापन समारोह में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश अब्दुल मोइन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए जिनका स्वागत विवि के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने किया। प्रो. पाठक ने न्यायमूर्ति को अटल बिहारी वाजपेई विधि संस्थान और विश्वविद्यालय की उपलब्धियों से अवगत कराया।

प्रतियोगिता के समापन समारोह में विजयी टीम को न्यायमूर्ति अब्दुल मोइन, प्रदीप कुमार सिंह, जिला एवं सत्र न्यायालय, कानपुर नगर, जय प्रकाश तिवारी, न्यायाधीश जिला एवं सत्र न्यायालय रामाबाई नगर, विवि के प्रतिकुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी, बिजनेस मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट के डीन प्रो. सुधांशु पांड्या ने ट्रॉफी एवं कैश प्राइज देकर सम्मानित किया। 

विवि के अटल बिहारी बाजपेयी विधि संस्थान में आयोजित फाइनल मुकाबले में दोनों ही टीमों ने अपनी अपनी प्रतिभा का दमदार प्रदर्शन करते हुए तीखी जिरह करते हुए अपना अपना पक्ष रखा। दो घंटे की तीखी बहस को सुनने के बाद न्यायपीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए मूट कोर्ट रूम को स्थगित किया।मूट कोर्ट प्रतियोगिता के सभी प्रतिभागियों द्वारा किए गए अपनी प्रतिभा के उम्दा प्रदर्शन ने इस प्रतियोगिता में चार चांद लगा दिए।

इसके पश्चात सीनेट हॉल में हुए समापन समारोह में मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति अब्दुल मोइन ने अपने वक्तव्य में प्रतिभागियों को उनकी जिरह और तैयारी के लिए प्रसंशा की। उन्होंने कहा कि छात्रों में कॉन्फिडेंस होना बहुत जरूरी है लेकिन ओवर कॉन्फिडेंस से व्यक्ति को निराशा हाथ लगती है। उन्होंने प्रतिभागियों को संबोधित करते कहा कि असफलता भी हमे कुछ न कुछ सीखाती है,असफलता से हमे अपनी कमजोरियों को जानने और उनसे पार पाने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि हमे अपने माता पिता और गुरु के प्रति आभारी होना चाहिए और हमें कोई भी ऐसा काम नहीं करना चाहिए जिससे उन्हें दुख पहुंचे। नौजवान अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि समाज के प्रति भी हमारा कर्तव्य है, हमे समाज को शिक्षित करना चाहिए और वंचितों की मदद करनी चाहिए।

विशिष्ट अतिथि प्रदीप कुमार सिंह, न्यायाधीश, जिला एवं सत्र न्यायालय, कानपुर नगर ने अपने वक्तव्य मे नौजवान अधिवक्ताओं की जिरह की सराहना करते हुए कहा कि न्याय बिना मूल्यांकन के संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि हमे अपने पेशे और अपने मुवक्किल व स्वयं का भी सम्मान करना चाहिए।

विशिष्ट अतिथि जय प्रकाश तिवारी, न्यायाधीश जिला एवं सत्र न्यायालय रामाबाई नगर ने अपने वक्तव्य में कहा कि व्यक्ति छात्र जीवन से ही सफलता की ऊंचाइयों को छूता है। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि ज्यादा से ज्यादा विषयों को पढ़ें। तर्क शक्ति को और विकसित करे यह आपको जीवन में नई ऊंचाइयों पर ले जायेगी। उन्होंने यह भी कहा कि हर पेशे में ईमानदारी को बनाए रखें। विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी ने अपने वक्तव्य में कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचना चाहिए और न्याय सही समय पर मिले यह हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि विवि में बीएएलएलबी, एमएएलएलबी, एलएलएम जैसे विधि के पाठ्यक्रमों की पहली इकाई भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित है जो कि भविष्य के अधिवक्ताओं, न्यायाधीशों में निर्णय लेने के कौशल को विकसित करता है।

प्रतियोगिता के समापन समारोह के कार्यक्रम में डॉ. शशिकांत त्रिपाठी, डॉ. दिव्यांशु शुक्ला, मयूरी सिंह, समरेंद्र सिंह, डॉ. स्मृति रॉय, डॉ.राहुल तिवारी आदि लोग उपस्थित रहे।

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