January 31, 2026

संवाददाता
कानपुर।
कल लिफ्ट में फंसने वाले युवक ने हल्दीराम रेस्टोरेंट कर्मियों के रवैये को बेहद खराब बताते हुए कहा कि हम 2 घंटे तक लिफ्ट में फंसे रहे। मेरी मां की तबियत बिगड़ने लगी। मैं डर गया। रोस्टोरेंट वाले सुन नहीं रहे थे। मैंने 112 नंबर पर पुलिस को डायल किया। कुछ देर बाद पुलिस आ गई। तब रेस्टोरेंट वाले एक्टिव हुए। पुलिस ने रेस्क्यू करके हम लोगों को बाहर निकाला।
हम लोग तो बस खतम थे, ये कहिये दूसरा जीवन मिला है। पुलिस के आने से हमारी जान बच गई। इतना बेकार स्टाफ है। हम लिफ्ट के अन्दर चिल्लाते रहे। लेकिन स्टाफ आवाज सुनकर भी जवाब नहीं दे रहा था।
उन्होंने बताया कि करीब डेढ़ घंटे तक रेस्टोरेंट कर्मी हम लोगों से झूठ बोलते रहे। अगर अंदर दम घुटने से हम लोगों की जान चली जाती तो इसका जिम्मेदार कौन होता? मैंने इतने लापरवाह लोग नहीं देखे।
आरके नगर में रहने वाले रजनीश ने बताया मेरा कंप्यूटर हार्डवेयर का काम है। मैं अपनी 67 वर्षीय मां कस्तूरी गुप्ता को लेकर काकादेव स्तिथ एक डाक्टर के पास गया था। डाक्टर से मिलने के बाद शाम करीब साढ़े छह बजे हल्दीराम के रेस्टोरेंट गए। यहां चाय पी और ढोकला खाया।
पेमेंट करने के बाद हम लोग सेकेंड फ्लोर से नीचे आने के लिये लिफ्ट में गए। लिफ्ट के भीतर जाकर जैसे ही बटन दबाया तो अचानक लिफ्ट बंद हो गई। करीब 15 मिनट लिफ्ट रुकी रही। मैंने सोचा शायद लाइट नहीं आ रही होगी, इसलिए रुक गई।
20 मिनट से अधिक समय हो गया। तब भी लिफ्ट रुकी हुई थी। फिर मैंने लिफ्ट के अंदर लिखे नंबर पर फोन किया। फोन उठाने वाले ने कहा कि कुछ देर में खुल जाएगी। ऐसे ही आधे घंटे से ज्यादा का समय हो गया।
इसके बाद मैंने अपने भाई को फोन किया। भाई काकादेव के हल्दीराम पहुंचे। एक घंटा हो गया। भाई ने रेस्टोरेंट वालों से कहा कि लिफ्ट खुलवाइए। रेस्टोरेंट वाले मेरे भाई से बोले कि चाबी मंगवाई है। कुछ देर में ही लिफ्ट खुल जाएगी।
इसी बीच माँ का दम घुटने लगा। उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगी। उनकी तबियत खराब होने लगी। मां को देखकर मैं डर गया। मैंने पुलिस को फोन कर दिया। करीब 10 मिनट में पुलिस आ गई। जब पुलिस वालों ने एक्शन लिया, तब रेस्टोरेंट वाले एक्टिव हुए।
इसके बाद रेस्टोरेंट वालों ने एक लड़के को चाबी लेने के लिए काकादेव से 7 किलोमीटर दूर बर्रा भेजा। तबतक पुलिस वालों ने दमकल कर्मियों को बुला लिया था।
सीएफओ दीपक शर्मा, फायर स्टेशन अफसर परमानंद पांडेय समेत टीम पहुंची और करीब 15 मिनट में रेस्क्यू करके टेक्नीशियन की मदद से हम लोगों को सकुशल बाहर निकाल लिया गया।
करीब दो घंटे लिफ्ट के भीतर ही मेरी मां और मैं फंसा रहा। मेरी मां की हालत ऐसी हो गई थी। कि उनका ब्लड प्रेशर बढ़ गया था। उनको शुगर और किडनी की दिक्कत है। इस वजर से मै और डर रहा था। ये ऊपर वाले की कृपा है, कि मैं और मां बच गए।। अगर मैं पुलिस को न बुलाता तो हम जिंदा बाहर नहीं आते।