आ स. संवाददाता
कानपुर। चैत्र नवरात्र के चौथे दिन मंगलवार को मां भगवती के चौथे स्वरूप कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की गई। देवी मंदिरों में सुबह से पूजा-अर्चना करने के लिए सुबह से श्रद्धालु पहुंचने लगे थे। मां को चढ़ावा चढ़ाकर घर में सुख-समृद्धि की कामना की गई । कूष्मांडा माता को आरोग्य की देवी माना जाता है, मान्यता है कि इनकी पूजा करने से व्यक्ति कुष्ठ जैसे असाध्य रोगों से मुक्ति पा जाता है।मंगलवार की सुबह से पूजा-अर्चना का क्रम शुरू हुआ जो कि देर शाम तक चलता रहा। मंदिरों में जय माता दी के जयकारे गूंजते रहे।
शहर के प्रसिद्ध तपेश्वूरी मंदिर में भोर से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही। माता के भक्तों ने नारियल, चुनरी व प्रसाद चढ़ाकर माता से धन, वैभव व आरोग्य का आशीर्वाद मांगा। मंदिर के पुजारी के मंगल के अनुसार यहां नवरात्र में हिंदू के अलावा अन्य धर्मों के लोग माता के पिंडी रुप का दर्शन करने आते हैं। मां के चरणों का नीर लगाने से आंखों से संबधित रोग दूर हो जाता है।
वहीं दक्षिणी हिस्सेे के बारा देवी,जंगली देवी आदि मंदिरों में माता के जयकारे गूंजते रहे। ग्रामीण इलाकों की अन्य मंदिरों में पूजा करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। देवी भक्तों ने घरों में व्रत रहकर पूजा की तथा घर में सुख-समृद्धि की कामना की।
जंगली देवी मन्दिर के पुजारी ने बताया कि मां कूष्मांडा की उपासना से भक्तों को सभी सिद्धियां मिलती हैं। मां कूष्मांडा की कृपा से लोग निरोग होते हैं और आयु व यश में बढ़ोत्तरी होती।