—नए पुलिस कमिश्नर की तैनाती को लेकर 7 आईपीएस के नामों पर चर्चाएं।

संवाददाता
कानपुर। बीते डेढ़ सालों में नगर के माफिया, भू माफिया और वसूली बाज़ों के साम्राज्य को ध्वस्त करने की जो मुहिम पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार ने शुरु की थी।उसमें लगभग अन्तिम मुकाम तक पहुंचता उनका स्थानांतरण केंद्र में एक महत्वपूर्ण ओहदे पर प्रति नियुक्ति के तौर पर किया गया है जो एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।परंतु कानपुर का वो पीड़ित जनमानस जो इन अराजक तत्वों द्वारा मानसिक, आर्थिक शारीरिक यातनाओ
को झेल रहा था।जिसको पुलिस कमिश्नर द्वारा ऑपरेशन महाकाल की शुरुआत के बाद राहत मिली थी और न्याय की उम्मीद बंध गई थी अब अखिल कुमार के स्थानांतरण के बाद वह निराशा की ओर है। परन्तु चर्चा ये भी है शासन आम जन की भावनाओं को समझते हुए गम्भीर मंथन कर रहा है कि यहाँ जिस कमिश्नर की नियुक्ति की जाये वो अखिल कुमार से कमतर ना हो।इसके लिए शासन उन आईपीएस अधिकारियों के नामों को खंगाल रहा है जो अपनी धारदार और पैनी सोच के लिए पहचाने जाते हैं।जो अपनी नियुक्ति से ऑपरेशन महाकाल की सफलतापूर्वक इतिश्री कर सके।पुलिस कमिश्नर के स्थानांतरण के बाद शासन में कानपुर के कमिश्नर की नियुक्ति के नामों पर चर्चा तेज़ हो गयी है। उत्तर प्रदेश पुलिस महकमे में चर्चित नामों में प्रमुख नवनीत सिकेरा, आलोक सिंह,रघुवीर लाल, नवीन अरोड़ा, अमरेंद्र सिंह सेंगर, सजीत पांडेय और लक्ष्मी सिंह समेत तमाम सीनियर आईपीएस अफसरों के नाम पर चर्चा है।
कानपुर में अब अगला पुलिस कमिश्नर कौन होगा…?अभी तक यह साफ नहीं हो सका है। इस बात की जानकारी के लिए सभी को बेसब्री से इंतजार है।
कानपुर पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार ने अपराधियों के खिलाफ एक्शन की शुरूआत वसूली बाज़ ब्लैकमेलर कथित पत्रकारो से की।कानपुर प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष अवनीश दीक्षित की गिरफ्तारी के बाद 42 से अधिक तथाकथित वसूली बाज़ पत्रकारों को जेल की सैर करवाने में सफल रहे। आगे की बढ़ती जांच में कानपुर के हर भूमाफिया और बड़े अपराधी और अपराध का कनेक्शन डॉ अखिलेश दुबे एडवोकेट तक पहुंच रहा था।
इसके बाद जांच की गई तो अपराधियों और अपराध का पूरा मकड़जाल सामने आया है। यह सिंडीकेट सिर्फ कानपुर ही नहीं पूरे यूपी में सक्रिय है। इसके बाद अखिल कुमार ने कार्यवाही करते हुऐ एक दर्जन से अधिक भू माफिया वकीलों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करके उन्हें जेल भेज दिया था। वहीं उनके द्वारा गठित की गई एसआईटी की जांच में सामने आया है कि कानपुर का एक अधिवक्ता अखिलेश दुबे पुलिस के लिए लिखापढ़ी का काम करता था। पुलिस की लिखापढ़ी करते-करते उसका नेटवर्क पुलिस महकमें में कई सीनियर आईपीएस अफसरों से लेकर पूरे प्रदेश की पुलिस में फैल गया।
आईपीएस से लेकर पीपीपीएस अफसरों ने अपनी काली कमाई भी दुबे के जरिए जमीनों में खपाना शुरू कर दिया था। दुबे की जांच शुरू हुई तो अरबों की संपत्तियां सामने आई हैं।
इसमें सैकड़ों बीघा तो सिर्फ जमीन है। इसके अलावा होटल, मॉल और उत्तराखंड, गोवा से लेकर अलग-अलग प्रॉपर्टी शामिल हैं।






