
संवाददाता
कानपुर। गांवों की गलियों में अजीब सा सन्नाटा है, लेकिन लोगों की आंखों में नींद नहीं है। वजह है चोरों का खौफ। घाटमपुर सर्किल के कई गांवों में पिछले एक महीने से चोरों की दहशत फैली है। हालात ये है कि अब ग्रामीण खुद हथियार संभालकर रातभर पहरा दे रहे हैं।
कहीं युवक लाठी लेकर सड़कों पर खड़े हैं, तो कहीं महिलाएं और बच्चे भी घरों के बाहर चौकसी कर रहे है।
परास गांव की महिलाएं डरी हुई थीं। उन्होंने बात करनी शुरू की तो बोलीं कि गांव में रात में गाड़ियां घूमती हैं, अजनबी लोग आते हैं। हम खुद रखवाली कर रहे हैं।
परास से 8 किलोमीटर दूर नौरंगा गांव के बाहर खडे युवक बोले, रात में गांव के चक्कर लगाते हैं। नींद नहीं आती, लेकिन सुरक्षा जरूरी है। बीते एक हफ्ते से लगातार गश्त कर रहे हैं। पुलिस पर भरोसा कम, खुद की पहरेदारी पर ज़्यादा यकीन है।
करीब 18 किलोमीटर दूर तिलसड़ा गाँव में ग्राम प्रधान पति खुद लाठी लेकर गश्त करते नजर आए। उन्होंने बताया, मैंने खुद दो बार चोरों को गांव में कार से घूमते देखा है। जब उनका पीछा किया गया तो भाग निकले। अब रात में खुद पहरा देता हूं। गांव के कुछ और लोग भी उनके साथ डटे थे। ग्रामीणों ने साफ कहा, जब तक चोर नहीं पकड़े जाते, चैन से नहीं बैठेंगे।
घाटमपुर एसीपी कृष्णकांत यादव और इंस्पेक्टर धनंजय कुमार पांडेय लगातार गांवों का दौरा कर रहे हैं और लोगों को समझा रहे हैं।
घाटमपुर सर्किल के कई गांवों में फिलहाल डर का माहौल है, लेकिन ग्रामीणों का हौसला मजबूत है। पुलिस की पेट्रोलिंग न के बराबर है, इसलिए लोगों ने खुद ही सुरक्षा की कमान संभाल ली है। अब सवाल ये है कि जब गांव वाले खुद रातभर जाग सकते हैं, तो पुलिस क्यों नहीं?
घाटमपुर एसीपी कृष्णकांत यादव और इंस्पेक्टर धनंजय कुमार पांडेय लगातार गांवों का दौरा कर रहे हैं। वे ग्रामीणों को समझा रहे हैं, कि अफवाहों पर ध्यान न दें। पुलिस पूरी तरह सतर्क है। और हर रात गश्त हो रही है। उन्होंने बताया कि घाटमपुर, जहांगीराबाद, बीरपुर, तिलसडा समेत 10 गांवों में पुलिस टीमें लगातार गश्त कर रही है






