• संघ की नई गाइडलाइन जारी, पारदर्शिता, खिलाड़ी सुरक्षा और भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार

संवाददाता
कानपुर। यूपीसीए ने जिला स्तर पर आयोजित होने वाली क्रिकेट लीगों को अब सख्त नियमों के दायरे में ला दिया है। संघ के सचिव प्रेम मनोहर गुप्ता ने जिला क्रिकेट संघों के लिए नई और विस्तृत गाइडलाइन जारी करते हुए साफ कर दिया है कि बिना अनुमति किसी भी तरह की क्रिकेट लीग का आयोजन नहीं किया जा सकेगा। इन नियमों का उद्देश्य लीग प्रतियोगिताओं को पारदर्शी, जवाबदेह और खिलाड़ियों के हितों के अनुरूप बनाना है।
नई व्यवस्था के तहत किसी भी जिला क्रिकेट लीग को शुरू करने से पहले कम से कम 30 दिन पहले संघ से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा। बिना स्वीकृति के आयोजित लीग को अवैध माना जाएगा और उस पर कार्रवाई भी हो सकती है।
गाइडलाइन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिला क्रिकेट संघ को यह बताना होगा कि लीग का आयोजन सीधे उसके द्वारा किया जा रहा है या किसी स्पोर्ट्स या इवेंट कंपनी के सहयोग से। यदि किसी निजी कंपनी को शामिल किया जाता है तो उसकी पूरी कानूनी जानकारी, अनुबंध का विवरण और जिम्मेदारियों की स्पष्ट घोषणा करनी होगी। हालांकि अंतिम जिम्मेदारी जिला क्रिकेट संघ की ही मानी जाएगी।
लीग के संचालन के लिए हर जिला क्रिकेट संघ को एक आयोजन समिति बनानी होगी, जिसमें संचालन, वित्त, खिलाड़ी पंजीकरण और अनुशासन से जुड़े अधिकारी शामिल होंगे। यह समिति सामूहिक रूप से पूरे आयोजन की निगरानी और जवाबदेही संभालेगी।
टीम मालिकों और फ्रेंचाइजी की पृष्ठभूमि की जांच भी अनिवार्य की गई है। उन्हें अपनी पहचान, वित्तीय स्रोत और हितों के टकराव से संबंधित घोषणा यूपीसीए को देनी होगी। जरूरत पड़ने पर संघ जिला क्रिकेट संघों की अतिरिक्त जांच भी कर सकता है।
खिलाड़ियों के ट्रायल और चयन प्रक्रिया को लेकर भी सख्त नियम बनाए गए हैं। ट्रायल की जानकारी पहले से संघ को देनी होगी और किसी भी खिलाड़ी से पैसे लेकर चयन का दावा करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। फीस और अन्य शुल्कों की जानकारी पहले से सार्वजनिक करनी होगी।
बाहरी खिलाड़ियों को लेकर भी सीमा तय की गई है। हर टीम में अधिकतम दो ही बाहरी खिलाड़ी शामिल किए जा सकेंगे और इसके लिए भी संघ की पूर्व अनुमति जरूरी होगी।
खिलाड़ियों के हितों और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह भी तय किया गया है कि किसी भी प्रकार का दबाव, उत्पीड़न या शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नाबालिग खिलाड़ियों के मामलों में माता-पिता को सभी नियमों और शुल्कों की स्पष्ट जानकारी देना अनिवार्य होगा।
आर्थिक पारदर्शिता को लेकर भी सख्त प्रावधान किए गए हैं। सभी भुगतान बैंकिंग माध्यम से ही होंगे और नकद लेनदेन की अनुमति नहीं होगी। फीस और पुरस्कार राशि की घोषणा पहले से करनी होगी और खिलाड़ियों से खेलने के लिए भुगतान लेना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
इसके अलावा लीग के प्रसारण या लाइव स्ट्रीमिंग के लिए भी संघ की अनुमति अनिवार्य होगी। मैच फिक्सिंग, सट्टेबाजी और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है और जरूरत पड़ने पर संघ निगरानी अधिकारी भी नियुक्त कर सकता है।
नई गाइडलाइन के लागू होने के बाद माना जा रहा है कि जिला स्तर की क्रिकेट लीगों में पारदर्शिता बढ़ेगी और खिलाड़ियों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।






