—कानपुर के गंगा मेला में सभी जमकर नाचे। ऊंट, घोड़े ट्रैक्टर पर निकले हुरियारे।

संवाददाता
कानपुर। मंगलवार को कानपुर में गंगा मेला के अवसर पर होली खेली गई। यह परंपरा पिछले 85 सालों से चली आ रही है। यह अकेली होली है, जो राष्ट्रगान के बाद शुरू होती है ।
रज्जन बाबू पार्क में जिलाधिकारी और पुलिस अफसरों ने तिरंगा फहराकर होली की शुरुआत की। क्रांतिकारियों के शिलालेख पर फूल भी अर्पित किए। कानपुर की इस खास होली का इतिहास 1942 में ब्रिटिश शासन से जुड़ा है, जब कानपुर में रंग खेलते 43 युवा क्रांतिकारियों को जेल में बंद कर दिया गया था। इसी परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए नगरवासियों, शासन, प्रशासन,व्यापारी वर्ग खास तौर से नगर के युवाओं की सहभागिता रहती है। आज जब रंगों के ठेले निकले क्षेत्रीय सपा विधायक अमिताभ बाजपेई ने रंगों में सराबोर होकर लोगों के साथ जमकर डांस किया। मेस्टन रोड में प्रत्येक वर्ष की भांति मुस्लिमों ने हिंदुओं का फूल बरसाकर स्वागत किया। माला भी पहनाई और नारे भी लगाये, ट्रैक्टर ट्रॉलियों और ऊंट पर सवार होकर हुरियारे निकले जमकर रंग-गुलाल बरसे।
हुरियारों ने नाचते-गाते और रंग खेलते छह घंटे में लगभग 7 किमी की दूरी तय करी ।
इस बार भैंसा ठेला नहीं निकाला गया। कमेटी के महामंत्री विनय सिंह ने बताया- इस बार हम लोगों ने भैंसा ठेला ढूंढने का बहुत प्रयास किया। मुंह मांगी कीमत भी देने को तैयार थे, लेकिन भैंसा ठेला नहीं मिला। इसलिए इस बार ट्रैक्टर ट्रॉलियों से रंगों के ड्रमो को निकाला गया। जिसमे 8 ट्रेक्टर 6 लोडर 5 बैटरी रिक्सा लोडर में 30 ड्रमों में रंगों को घोल के रखा गया था साथ ही 7 ऊंट, 6 घोड़े, से भी
पिचकारी से भी रंग बरस रहे थे।
रज्जन बाबू पार्क से रंगों का ठेला निकला, जो शहर के प्रमुख बाजारों और मार्गों से होकर गुजरा। यह ठेला सूत बाजार, जनरलगंज, बजाज बाजार, मनीराम बगिया, गया प्रसाद लेन, मेस्टन रोड, चौक, टोपी बाजार, सर्राफा बाजार, कोतवाली चौराहा, संगम लाल मंदिर, कमला टावर, फीलखाना, होते हुए बिरहाना रोड पहुंचा जहां पर गंगा मेला के दौरान पारंपरिक कपड़ा फाड़ होली खेली गई। ढोल-नगाड़ों और होली गीतों के बीच हुरियारे नाचते-गाते एक-दूसरे के कपड़े फाड़कर हवा में उछालते नजर आए। रंग और गुलाल के बीच हजारों लोग इस अनोखी होली का हिस्सा बने ।
बिरहाना रोड पर गंगा मेला के दौरान हजारों लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। यहां करीब 20 हजार से ज्यादा लोग एक साथ रंग-गुलाल के साथ होली खेलते नजर आए। ढोल-नगाड़ों और होली गीतों के बीच हुरियारों की टोली ने कपड़ा फाड़ होली शुरू कर दी। जोश में लोग नाचते-गाते एक-दूसरे पर रंग बरसाते रहे और पूरे इलाके में रंगों का गुबार छाया रहा। उसके बाद नयागंज चौराहा, पूरन पान वाला, काहूकोठी, सतरंजी मोहाल, सिरकी मोहाल और लाठी मोहाल होते हुए वापस जनरलगंज से हटिया स्थित रज्जन बाबू पार्क पहुंचा, जहां कार्यक्रम का समापन हुआ। दिन में रंग खेलने के बाद शाम को मेला कमेटी की ओर से बाल मेला लगा। इसमें बच्चों के लिए झूले, फूड स्टॉल लगें और आतिशबाजी भी हुई।
मेला समापन के अंतिम पड़ाव में मेला कमेटी के अध्यक्ष ज्ञानेंद्र विश्नोई, महामंत्री विनय सिंह, कोषाध्यक्ष रोहित बाजपेयी, कार्यकारणी सदस्य संदीप मिश्रा, उत्तम बाजपेई, शरद दुबे, ऋतु राज गुप्ता आदि ने मेले में सहभागिता करने वाले सभी लोगों को धन्यवाद देते हुए आगामी गंगा मेला का निमंत्रण भी दिया।






