
संवाददाता
कानपुर। औद्योगिक नगरी के रूप में पहचाना जाने वाला कानपुर इस बीते 2025 के साल में खेल गतिविधियों के मामले में कुछ खास उपलब्धि दर्ज नहीं कर सका। अक्टूबर की शुरुआत में क्रिकेट के बड़े आयोजन को छोड़ दिया जाए तो किसी भी खेल का आयोजन तक राष्ट्रीय स्तर पर नहीं हो पाया जिससे खिलाड़ियों को वो मंच ही नहीं मिल सका जिसपर चढ़ वह राष्ट्रीय फलक पर अपनी चमक बिखेर सके।
जिस शहर ने कभी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी देश को दिए, वहां वर्ष भर खेल मैदानों की खामोशी और आयोजनों की कमी साफ दिखाई दी। उम्मीदों से भरा यह साल खेल प्रेमियों के लिए निराशा लेकर आया।शहर में क्रिकेट, हॉकी, फुटबॉल, कुश्ती और एथलेटिक्स जैसे खेलों की परंपरा रही है, लेकिन इस वर्ष न तो बड़े स्तर की प्रतियोगिताएं आयोजित हो सकीं और न ही खिलाड़ियों को नियमित अभ्यास के लिए पर्याप्त सुविधाएं मिल पाईं। ग्रीन पार्क स्टेडियम में अंतरराष्ट्रीय या बड़े घरेलू मैचों का अभाव रहा, जिससे न सिर्फ खिलाड़ियों बल्कि दर्शकों में भी उत्साह की कमी देखने को मिली।स्थानीय खेल संगठनों का कहना है कि संसाधनों की कमी और प्रशासनिक उदासीनता के कारण खेल गतिविधियां प्रभावित हुईं। कई खेल मैदानों की हालत खराब रही, कहीं घास उगी रही तो कहीं रखरखाव के अभाव में सुविधाएं जर्जर होती चली गईं। छोटे स्तर पर आयोजित होने वाली जिला और मंडलीय प्रतियोगिताएं भी सीमित संख्या में ही हो सकीं।स्कूल और कॉलेज स्तर पर भी खेलों को अपेक्षित बढ़ावा नहीं मिल पाया। शैक्षणिक संस्थानों में वार्षिक खेल प्रतियोगिताएं औपचारिकता बनकर रह गईं। प्रशिक्षकों की कमी और आधुनिक उपकरणों के अभाव में प्रतिभाशाली खिलाड़ी खुद को आगे बढ़ाने में असमर्थ नजर आए। कई युवा खिलाड़ी बेहतर प्रशिक्षण और अवसरों की तलाश में दूसरे शहरों की ओर रुख कर लिया।
हॉकी और फुटबॉल जैसे पारंपरिक खेल, जो कभी कानपुर की पहचान हुआ करते थे, इस साल हाशिए पर रहे। न तो कोई बड़ा टूर्नामेंट हुआ और न ही नई प्रतिभाओं को सामने लाने के लिए विशेष पहल की गई। कुश्ती और एथलेटिक्स में भी हालात कुछ अलग नहीं रहे। कुछ व्यक्तिगत प्रयासों के बावजूद सामूहिक स्तर पर ठोस परिणाम नहीं दिखे।खेल प्रेमियों और पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि यदि समय रहते ठोस योजना नहीं बनाई गई तो आने वाले वर्षों में स्थिति और चिंताजनक हो सकती है। उनका सुझाव है कि खेल मैदानों का विकास, नियमित प्रतियोगिताओं का आयोजन और योग्य प्रशिक्षकों की नियुक्ति प्राथमिकता में शामिल होनी चाहिए। साथ ही, निजी और सार्वजनिक भागीदारी से खेलों को नया जीवन दिया जा सकता है।कुछ युवा खिलाड़ियों ने राज्य स्तर पर अच्छा प्रदर्शन कर शहर का नाम रोशन किया, लेकिन ऐसे उदाहरण गिने-चुने ही रहे। इन सफलताओं को आधार बनाकर यदि भविष्य की रणनीति तैयार की जाए तो कानपुर एक बार फिर खेल नक्शे पर अपनी मजबूत पहचान बना सकता है। वेटलिफ्टर खिलाड़ी सना अहमद खान के अनुसार इतने बड़े शहर में किसी भी खेल की राष्ट्रीय प्रतियोगिता का आयोजन खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने में सहायक रहती है इस साल वो मंच नहीं मिल सका जिससे खिलाड़ियों में उदासीनता है। बैडमिंटन खिलाड़ी आशीष गौड़ के अनुसार जो बीत गया वो वापस नहीं आ सकता।खेल संघों को चाहिए कि नगर में कुछ प्रतियोगिताओं का आयोजन करें ताकि खिलाड़ियों को भविष्य के लिए तैयारी का अवसर मिल सके।






