April 12, 2026

• खेतो और झोपड़ियो में लोकेशन ट्रेस करना था मुश्किल।

संवाददाता 

कानपुर।  नगर में साइबर ठगो के एक बहुत बड़े अड्डे का भंड़ाफोड़ हुआ था।  पुलिस 17 गाड़ियों के साथ फिल्मी स्टाइल में पहुंची। ड्रोन से रेकी करते हुए पूरे इलाके को चारो ओर से घेर लिया। फिर खेतों में बनीं झोपड़ियों से 20 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया। इन झोपड़ियों से ही ये लोग ठगी का धंधा चलाते थे। 

ये रेउना के रठिगांव, समाजनगर, लक्ष्मनपुर, बड़ेला और आदिगांव के रहने वाले हैं। ये गांव साइबर ठगी का हॉटस्पॉट बन चुके हैं। यहां हर घर में ठगी का काम किया जाता है।

ठगी के चलते इस इलाके को ‘यूपी का जामताड़ा’ कहा जाने लगा है। पुलिस का कहना है कि जब भी टीम कार्रवाई के लिए पहुंचती है, तो गांव की महिलाएं आरोपियों को बचाने के लिए सामने आ जाती हैं।
यहां पुलिस को कार्रवाई करने के लिए करीब 3 महीने तक फील्ड एक्सरसाइज करनी पड़ी। फिर 6 अप्रैल को पुलिस ने चारों ओर से गांव को घेरकर 20 आरोपियों को गिरफ्तार किया। ये आरोपी दूसरे के नाम पर सिम कार्ड खरीदते थे और फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंक खाते खुलवाते थे।
इन्हीं सिम और खातों के जरिए आरोपी देश के अलग-अलग राज्यों के लोगों को अपने जाल में फंसाकर साइबर ठगी को अंजाम देते थे। पुलिस अब गिरोह के नेटवर्क और अन्य सहयोगियों की तलाश में जुटी है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल है। 

रेउना थाना क्षेत्र के गांव रठिगांव, समाजनगर, लक्ष्मनपुर, बड़ेला और आदिगांव साइबर-फ्रॉड का गढ़ बन गया है। 5वीं पास से लेकर 12वीं फेल लोग इस काम में शामिल हैं। ठग लोगों को कई तरह से अपने जाल में फंसाते हैं।
ये आरोपी कॉल करने के लिए फर्जी आईडी पर सिम कार्ड खरीदते हैं। उसके बाद पेमेंट्स बैंक के अकाउंट बनाते थे- जैसे कि एयरटेल पेमेंट्स बैंक, फिनों पेमेंट्स बैंक। इन बैंकों के एकाउंट खोलने के लिए केवल एक मोबाइल बैंकिंग एप डाउनलोड करना होता है। ये लोग खुद ही आरोपी केवाईसी कर लेते थे। आरोपी इस तरह के एकाउंट को एक खरीदते भी हैं। इसके लिए ये साइबर फ्रॉड अन्य लोगों से एकाउंट और सिम कार्ड खरीदते थे।
आरोपी देश के विभिन्न हिस्सों के लोगों को फोन करके कहते कि आप पोर्न वेबसाइट देखते हैं। मैं पुलिस वाला हूं। हमने तुम्हारी लोकेशन ट्रेस कर ली है। हम लोग तुम्हे  गिरफ्तार करने के लिए आ रहे हैं।
इसी बातचीत के बीच में एक सदस्य पुलिस का हूटर बजाया करता था। उसके बाद पहला आरोपी गैंग के तीसरे आरोपी को अपना बॉस बताते हुए बात करने के लिए कहता था। ये लोग केस खत्म करने की बात करते हुए लोगों से रुपए ठगते थे।
आरोपियों ने पुलिस पूछताछ में बताया- हम लोग एक दिन में करीब 50 नंबरों पर फोन करते थे, जिसमें 5 से 6 लोगों को सॉफ्ट टारगेट बनाते थे। उनसे पैसे वसूलते थे। ये आरोपी गूगल पे, फोन पे या यूपीआई के जरिए एकाउंट में पैसे ट्रांसफर करवाते थे। इसके अलावा सरकारी योजनाओं में कागजात न पूरे होने की बात करके भी ठगी करते थे।
आरोपी ठगी के लिए खास टारगेट चुनते थे। इनमें सरकारी कर्मचारी, रिटायर्ड कर्मी, सरकारी योजनाओं में आवेदन करने वाले लोग और अधेड़ उम्र के व्यक्ति शामिल थे। इन्हें पोर्न वेबसाइट के नाम पर डराकर और खुद को पुलिस अधिकारी बताकर ठगी को अंजाम दिया जाता था।
गिरोह ने उन्नाव पुलिस लाइन में तैनात एक सिपाही को भी नहीं छोड़ा। आरोपियों ने उसे पोर्न वेबसाइट का डर दिखाकर करीब 40 हजार रुपए ठग लिए थे। ये आरोपी विभिन्न वेबसाइट्स से लोगों के मोबाइल नंबर जुटाते थे। इसके बाद कॉल कर डर और दबाव बनाकर उनसे पैसे ऐंठ लेते थे।
पुलिस के अनुसार, आरोपी पहले तमिलनाडु, गुजरात और दिल्ली की टेक्सटाइल कंपनियों में काम करते थे। वहीं, उनकी मुलाकात साइबर ठगी करने वाले गिरोहों से हुई। इसके बाद वे अपने गांव लौटे और आसपास के लोगों को इस ठगी के तरीके सिखाकर अपने गैंग में शामिल कर लिया।
महंगे शौक और जल्दी पैसा कमाने की चाह में ये लोग अपराध की दुनिया में उतर गए। अवैध कमाई से ये अपने शौक पूरे करने के लिए नेपाल तक जाने लगे, जबकि बाकी पैसे से घर का खर्च चलाते थे।जब घर की आर्थिक स्थिति सुधरने लगी, तो परिजनों ने भी इन गतिविधियों का विरोध नहीं किया। उल्टा, कई मामलों में परिवार के लोग इन्हें संरक्षण देने लगे।
कानपुर पुलिस को देशभर से साइबर फ्रॉड की शिकायतें मिल रही थी। जब पुलिस ने ‘प्रतिविम्ब’ पोर्टल पर जांच शुरू की, तो शहर की बाहरी सीमा से जुड़े कई गांव संदिग्ध पाए गए। जांच में सामने आया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान आरोपी कानपुर नगर की सीमा छोड़कर तुरंत कानपुर देहात में भाग जाते थे, जिससे उन्हें पकड़ना मुश्किल हो जाता था।
जब भी टीम गांव में दबिश देने पहुंचती थी, तो महिलाएं आरोपियों को बचाने के लिए सामने आ जाती थी। इस बार पुलिस ने रणनीति बदलते हुए करीब 3 महीने तक गोपनीय जांच की। सिविल ड्रेस में पुलिसकर्मियों ने गांव-गांव घूमकर साक्ष्य जुटाए और ड्रोन कैमरों से कई बार रेकी की।
पुलिस ने बड़े स्तर पर छापेमारी की योजना बनाई। करीब 17 गाड़ियों के काफिले और लगभग 20 महिला पुलिसकर्मियों के साथ एक साथ पूरे गांव में दबिश दी गई, ताकि आरोपी भाग न सकें। इस सघन कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 20 साइबर फ्रॉड के आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हुई है।
पुलिस टीम ने थाना रेउना क्षेत्र के ग्रामीण बैंक और पंजाब नेशनल बैंक में जांच की। इस दौरान पहले गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े बैंक खातों का विस्तृत सत्यापन किया गया। साथ ही फ्रीज किए गए खातों से संबंधित जरूरी दस्तावेज और तकनीकी साक्ष्य जुटाए गए। अब इन खातों की लेन-देन श्रृंखला का विश्लेषण कर अन्य संदिग्ध खातों और लोगों की पहचान की जा रही है।
पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने बताया- साइबर फ्रॉड में 7 साल से कम सजा होने के कारण आरोपी जल्दी छूट जाते थे। लेकिन इस बार आरोपियों को फर्जी दस्तावेज और साइबर फ्रॉड के मामलों में जेल भेजा जा रहा है। साथ ही पूरे नेटवर्क की गहन जांच के निर्देश दिए गए हैं।
जांच में सामने आया है कि गिरोह में शामिल अधिकतर आरोपी 5वीं पास से लेकर 12वीं फेल हैं और उनकी उम्र 27–28 वर्ष के आसपास है। ये आरोपी पुलिस से बचने के लिए खेतों और बागों में झोपड़ी बनाकर वहीं से साइबर ठगी को अंजाम देते थे, जिससे उनकी लोकेशन ट्रेस करना मुश्किल हो जाता था।
पुलिस के अनुसार, करीब तीन महीने की लगातार जांच और मेहनत के बाद पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया गया है। आगे भी इस तरह की कार्रवाई जारी रहेगी। 

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