March 4, 2026

संवाददाता
कानपुर।
  कमरे में आत्महत्या करने वाले बीएएमएस के छात्र शैलेंद्र कुमार के परिजन कानपुर पहुंचे। बेटे की मौत से बदहवास पिता कानपुर नहीं आए।
प्राइवेट हॉस्पिटल में जॉब करने वाले मृतक के बड़े भाई ने बताया कि सुसाइड से 30 मिनट पहले बहन और मेरी शैलेंद्र से बात हुई थी। बातचीत में ऐसा लगा ही नहीं कि वह सुसाइड कर लेगा। कुछ देर बाद घर में पुलिसवालों ने फोन करके कहा- शैलेंद्र ने फांसी लगा ली है।
भाई ने बताया- बैक लगने के बाद वह परेशान था। मैंने उससे कहा था कि परेशान मत हो… पापा से मत कहना। मैं तुम्हें बैक फॉर्म भरने के लिए 15 हजार रुपए दे दूंगा। शुक्रवार को मेरी शैलेंद्र से दो-तीन बार बात हुई थी। उसने कहा कि पापा ने पैसे नहीं भेजे, जिस पर मैंने कहा कि 3 तारीख को तुम्हारे खाते में पैसे आ जाएंगे। कुछ देर बाद मैंने अपने दोस्त से उसके खाते में ऑनलाइन 100 रुपए भेजे। शैलेंद्र कुमार मूल रूप से चित्रकूट कर्वी का रहने वाला था।
शैलेंद्र के सुसाइड की जानकारी पर देर शाम उसके बड़े भाई लालेंद्र, जीजा उमाशंकर, मामा शंकर गुप्ता, भांजा मनी गुप्ता और लालेंद्र के तीन दोस्त कानपुर पहुंचे। बेटे की मौत से पिता बेसुध हो गए, जिसपर परिजन उन्हें लेकर नहीं आए।
शहर पहुंचने के बाद वह परिजन सबसे पहले मंधना स्थित शैलेंद्र के कमरे पहुंचे। इसके बाद उसके कॉलेज के दोस्तों से जानकारी ली। लालेंद्र ने बताया कि शैलेंद्र 2019 से घर से बाहर रह रहा था, 2020 में वह राजस्थान कोटा से नीट की तैयारी कर रहा था। इसके बाद 2021 में उसे रामा आयुर्वेदिक इंस्टीट्यूट में दाखिला मिला था।
लालेंद्र ने बताया कि उनके पिता बृज किशोर रिटायर्ड शिक्षक हैं। घर में पांच बहनें हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। उनकी रोजाना दिन में दो से तीन बार शैलेंद्र से बात होती थी। तीसरे सेमेस्टर में अगद तंत्र, रस शास्त्र, रोग निदान एवं विकृत विज्ञान में बैक लगने के बाद वह परेशान था।
मृतक के भाई ने बताया कि शुक्रवार रात करीब 9 बजे उसे फोन मिलाया तो कॉल रिसीव नहीं हुई। फिर मैंने अपनी बड़ी बहन विमला को फोन करने को कहा। हम दोनों लोगों ने तकरीबन 15 बार उसे फोन किया था, लेकिन बात नहीं हो सकी।
सुबह मैंने उसे 11.02 बजे कॉल किया, तो कॉल रिसीव हुई। मैंने उससे कहा कि बाबू रात में हम और दीदी तुम्हें फोन कर रहे थे। फोन उठा लिया करो, तो वह बोला कि ठीक है भैया। मेरी उससे 1 मिनट 13 सेकेंड बात हुई। मैंने उससे कहा कि तुम्हें पैसे भेजने हैं। आज भेज देंगे, जिस पर उसने हामी भरी।
शनिवार सुबह कुछ देर बाद बहन विमला ने उससे बात की, फिर 11.45 बजे घर पर पुलिस वालों का फोन आया। उन्होंने कहा कि आपके बेटे ने फांसी लगा ली। मैंने 11.59 बजे भाई के नंबर पर फोन किया तो पुलिस ने फोन उठाया। 
उन्होंने बताया कि दिसंबर से वह घर पर ही खाना बनाता था। मैंने कहा कि तुम टिफिन क्यों नहीं मंगाते? तुम खाना नहीं बना पाते हो तो वह कहता था कि मुझे टिफिन का खाना अच्छा नहीं लगता। मेरे भाई की किसी से दोस्ती यारी नहीं थी। वह अकेले कमरे में रहता था, भाई ने जब फांसी लगाई तो गेट खुला हुआ था। पैर दोनो जमीन में रखे हुए थे, बगल में बेड पड़ा हुआ था।