
संवाददाता
कानपुर। बिल्हौर के गंगा तट पर स्थित गौरी गांव के राम जानकी मंदिर में एक अनूठे संत निवास करते हैं। संत रघुवरदास महात्यागी पिछले 12 वर्षों से केवल दो उबले आलू और जल पर जीवन व्यतीत कर रहे हैं। रघुवरदास का जन्म 1979 में उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के मौरा गांव में हुआ। वे किसान चुम्मन राय की आठवीं संतान हैं। मात्र सात वर्ष की आयु में उनकी माता का देहांत हो गया।
बचपन से ही ईश्वर भक्ति में लीन रहने वाले रघुवरदास 14 वर्ष की आयु में घर छोड़कर नीमसार पहुंच गए। वहां उन्होंने चार वर्ष तक संत सेवा की। इसके बाद अयोध्या में 12 वर्ष तक भगवान राम की भक्ति और संत सेवा में समय बिताया। 30 वर्ष की आयु में वे धार्मिक स्थलों की यात्रा पर निकले। हिमालय में तपस्वियों के साथ रहते हुए उन्होंने अन्न का त्याग कर दिया।
वे केवल कंदमूल फल खाने लगे। बाद में उन्होंने सिर्फ दो उबले आलू प्रतिदिन खाना शुरू किया। कभी-कभी नीम की पत्तियां और मूंगफली का सेवन भी करते हैं। 2014 में वे बिल्हौर के गौरी गांव स्थित राम जानकी मंदिर पहुंचे। यहां चार वर्षों से ईश्वर भक्ति में लीन हैं।
बचपन से ही राम में रमे रघुवर दास सन 2017 में अयोध्या पहुंच गए और प्रमोद वन जानकी अखाड़ा में ईश्वर भक्ति करने लगे।इसी बीच राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ होने से वह मंदिर निर्माण और भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा का साक्षी बनने के बाद अयोध्या में ही ठहर गए।
लेकिन गौरी के राम-जानकी आश्रम में आने जाने वाले उनके भक्त उन्हें भुला नहीं सके और लगभग दो माह पूर्व अयोध्या पहुंचकर उनकी मान मनौव्वल कर उन्हें वापस आश्रम ले आए। संत यहां आश्रम के एक कोने में तार और रस्सी से बैरीकेडिंग कर उसी में तप करने लगे और भक्तों को उनका आशीर्वाद प्राप्त होने लगा।






