
संवाददाता
कानपुर फरवरी के महीने के अंतिम दिनों में गर्मी रोज नए रिकार्ड बना रही है। मंगलवार को अधिकतम तापमान 29.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जो कि सामान्य से 3.5 डिग्री ज्यादा रहा। इससे पहले साल 2022 में अधिकतम तापमान 30 डिग्री था।
साल 2006 में तापमान 29.5 डिग्री गया था। फरवरी महीने में पड़ रही गर्मी ने 23 साल का रिकार्ड तोड़ा है। वहीं न्यूनतम तापमान 11.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो कि सामान्य से 2.4 डिग्री कम है।
लगातार बढ़ रहे तापमान का असर गेहूं, सरसों, राई और अलसी आदि पर पड़ना तय है। कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि सामान्य से ज्यादा गर्मी पड़ने से उत्पादन 10-15 प्रतिशत घटेगा।
सीएसए के डायरेक्टर रिसर्च व कृषि वैज्ञानिक डॉ. महक सिंह ने बताया कि फरवरी महीने में गर्मी सामान्य से ज्यादा पड़ा रही है। इस समय खेतों में गेहूं, जौ, चना, मटर, मटर, मसूर, पीली सरसों, तोरिया और लाही खड़ी हुई हैं। तापमान बढ़ने से फसलें प्री मेच्योर होंगी।
सबसे बड़ी बात यह है कि उत्पादन 10-15 प्रतिशत तक घटेगा। तापमान यदि औसत के आसपास नहीं आया तो और भी नुकसान हो सकता है। इसके अलावा लोबिया और पीली सरसों पकने की अवस्था में हैं, इससे तेल की मात्रा भी कम हो सकती है। दाना भी छोटा होगा। किसानों को इस समय खेतों में सिंचाई करते रहनी चाहिए, जिससे तापमान का असर कम पड़े।
गेहूं वैज्ञानिक डॉ. विजय यादव ने बताया कि गेहूं की फसल के लिए इस समय अधिकतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए। यदि तापमान इससे बढ़ रहा है तो फसल के उत्पादन, दाना आदि के लिए नुकसानदायक है।
यह बढ़ा हुआ तापमान यदि लगातार बना रहा तो फसलें प्रभावित होंगी। इस समय अगर हम तापमान की बात करें तो 14 फरवरी से तापमान 26 डिग्री के पार बना हुआ है।
मौसम विशेषज्ञ डॉ. एसएन सुनील पांडेय ने बताया कि आने वाले 24 घंटों में बंगाल की खाड़ी में बने मौसमी सिस्टम के चलते बादल छा सकते हैं। लेकिन बारिश की संभावना नहीं है। दिन में बादल छाने से अधिकतम तापमान गिरेंगे। इसके अलावा उत्तर पश्चिमी हवाएं भी तापमान पर नियंत्रण कर सकती है। इसके बाद तापमान लगातार बढ़ेगा।






