
संवाददाता
कानपुर । ककवन ब्लॉक स्थित जमालपुर गांव की गौशाला में मवेशियों की स्थिति चिंताजनक है। गौशाला में चारे-पानी की कमी के साथ साफ-सफाई का अभाव है। परिसर में हर तरफ कीचड़ और गोबर फैला हुआ है। गौशाला के आसपास मृत पशुओं के कंकाल मिले हैं।
एक गड्ढे में तीन-चार पशुओं के शव पड़े हैं। इन शवों को ठीक से दफनाया नहीं गया है। शवों के कुछ हिस्से खुले हुए हैं, जिससे दुर्गंध फैल रही है। नांदों में चारे की कमी है। कमजोर पशु गंदगी में पड़े हुए है।
एक गाय की स्थिति विशेष रूप से गंभीर है।उसकी आंखों से खून निकल रहा है और वह उठने-बैठने में भी असमर्थ है।
गोपालक राधे के अनुसार, गौशाला में चारा-पानी की व्यवस्था है,लेकिन गंदगी के कारण पशु बीमार पड़ रहे हैं।पशु चिकित्सक की नियमित उपलब्धता नहीं है।
पंचायत सचिव केबी सिंह का दावा है कि दो दिन पहले गौशाला की स्थिति ठीक थी। बीडीओ यशवीर सिंह ने बताया कि हाल ही में तीन पशुओं की मौत हुई है।इन शवों को गौशाला के पास दफनाया गया था,लेकिन आवारा कुत्तों ने मिट्टी खोदकर शवों को बाहर निकाल दिया।
दो सप्ताह पहले शिवराजपुर की कमालपुर गौशाला में भी ऐसी ही स्थिति सामने आई थी। मीडिया में खबर आने के बाद वहां सुधार किया गया, लेकिन जमालपुर गौशाला की वर्तमान स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि क्या सभी गौशालाओं की यही स्थिति है। सरकार की मंशा गौवंश के संरक्षण की है। लेकिन वास्तविकता में गौशालाएं छुट्टा गोवंश के लिए आश्रय स्थल के बजाय यातना केंद्र बन गई हैं।
गौशालाओं की इस स्थिति के लिए कई स्तरों पर जिम्मेदारी तय होती है। प्रधान, सचिव और वीडीओ के अलावा वरिष्ठ अधिकारी भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। अधिकारी स्थिति से अवगत होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं करते। कमालपुर में समय पर उचित कार्रवाई की गई होती तो संभवतः जमालपुर में यह स्थिति न देखने को मिलती।
गौरक्षक दल और अन्य सामाजिक संगठन भी केवल मीडिया में चर्चित गौशालाओं तक ही सीमित रहते हैं।अन्य गौशालाओं की स्थिति की जांच करने की आवश्यकता नहीं समझते।






