March 4, 2026

संवाददाता

कानपुर।  कल्याणपुर क्षेत्र में स्थित कानपुर की बुद्धा पार्क में ज्योर्तिलिंगों की योजना पर बढ़े विरोध से नगर निगम बैकफुट पर जाते हुए दिखाई दे रहा है। बीते दो दिनों पूर्व नगर निगम की टीम ने वहाँ निरीक्षण कर 12 ज्योर्तिलिंगों की स्थापना कडन्स जे निर्देश दिए थे।दलित समाज के विरोध के चलते राजनीति एक बार फिर सुर्खियों में है। इस दफा सियासत की वजह से नहीं, बल्कि गौतम बुद्ध पार्क की वजह से। क्योंकि, इस पार्क का अस्तित्व खत्म होने जा रहा है। अब यहां प्रयागराज के शिवालय पार्क की तर्ज पर 12 ज्योर्तिलिंगो के स्वरूप स्थापित करने की तैयारी है। यहाँ टूरिस्ट प्लेस डेवलप करने के लिए कानपुर निगम निगम सर्वे पूरा कर चुका है, जल्द यहां कंस्ट्रक्शन शुरू हो जाएगा।
ये पार्क कल्याणपुर के इंद्रानगर में बना हुआ है। पार्क का मुख्य गेट लाल पत्थरों की मदद से तैयार किया गया है। एक बोर्ड भी लगा है, जिस पर इस पार्क को कब बनाया गया, कितनी लागत थी, इसका जिक्र है।
इससे पता चलता है कि मायावती की सरकार में 8 सिंतबर, 1997 को गौतमबुद्ध पार्क का निर्माण कराया गया था। करीब 15 एकड़ जमीन पर यह पार्क फैला हुआ है।
मगर गेट पर लगे लाल पत्थर अब टूट चुके हैं। इनकी मरम्मत नहीं करवाई गई थी। अंदर एक वक्त पर हरे भरे घास के मैदान में झूले और बोटिंग की सुविधा थी। मगर अब झील सूख चुकी थी। इसमें बोट भी नजर नहीं आ रही थीं। झूले लगे थे, मगर अब पूरी तरह से जंग खा चुके है।
पार्क के कुछ हिस्सों की झाड़ियां बड़ी हो गईं थीं, इनकी लंबे समय से कटाई-छंटाई नहीं हुई है। लोगों के मुताबिक कल्याणपुर के करीब 200-250 लोग हर रोज यहां सुबह टहलने आते हैं। बाहर सुबह के वक्त जूस वगैरह की दुकान सजती है।
इस पार्क को लेकर लोगों ने बताया कि भाजपा विधायक प्रेमलता कटियार ने 1995 को यहां ग्रीन बेल्ट बनवाई थी। इस लैंड पर एक बारातघर भी तैयार कराया गया था। मगर जब मायावती की सरकार बनी, तो उन्होंने इसको तोड़कर गौतमबुद्ध पार्क बनवाया था।
जुलाई, 2025 में कानपुर नगर निगम की टीम ने गौतमबुद्ध पार्क और उसके आसपास की जमीनों का दौरा किया। प्रयागराज की तर्ज पर यहां के शिवालय पार्क बनाने का प्रोजेक्ट फाइनल किया गया। इस ब्लू प्रिंट पर जमीन पर काम शुरू नहीं हुआ है। मगर इस पर सियासत शुरू हो चुकी है।
वेस्ट यूपी की नगीना सीट से सांसद चंद्रशेखर ने इस मुद्दे पर 31 अगस्त, 2025 को सीएम योगी आदित्यनाथ को लेटर लिखा है। उन्होंने लिखा है नगर निगम कानपुर गौतमबुद्ध पार्क को शिवालय पार्क में बदलना चाहता है। ये जगह शहर के सबसे बड़े पार्को में शामिल है। गौतम बुद्धा पार्क केवल हरित क्षेत्र नहीं है, बल्कि बाबा साहेब और भगवान गौतम बुद्ध की करुणा, समानता और बंधुत्व के विचारों से जुड़ा हुआ प्रतीकात्मक स्थल है।

इसे किसी विशेष धर्म-सम्प्रदाय के स्वरूप में परिवर्तित करना बहुजन समाज की भावनाओं को आहत करेगा। संविधान की भावना भी यही है कि सार्वजनिक स्थल को किसी विशेष धार्मिक रूप में परिवर्तित न किए जाए। हम सब धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं, मगर यह अत्यावश्यक है कि गौतम बुद्धा पार्क का मूल स्वरूप सुरक्षित रखा जाए। नए प्रोजेक्ट कहीं और बनाए जाएं।
पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने एक्स हैंडल पर लिखा कि
भारत के संविधान के अनुसार भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां पर अलग-अलग धर्मों और जातियों के लोग रहते हैं। हर धर्म के लोगों के अपने-अपने पूजास्थल हैं, इसके तहत ही कानपुर नगर में बुद्ध पार्क स्थित है, जो यहां बौद्ध धर्म और अम्बेडकर अनुयायियों की आस्था का केंद्र है।
मगर बीजेपी सरकार द्वारा इस बौद्ध पार्क में दूसरे धर्म के पूजा स्थल का निर्माण प्रस्तावित है, यह उचित नहीं है। बीजेपी सरकार इसे तत्काल रोके, वरना यहां लोगों के बीच अशांति और घृणा फैल सकती है।
इस पर नगर आयुक्त सुधीर कुमार ने कहा कि पार्क और पर्यटन स्थल के डेवलपमेंट को लेकर हम लोगों ने गौतमबुद्ध पार्क के पीछे की जमीन को चिह्नित किया है। पार्क के साथ कोई छेड़खानी नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि ये पूरा पार्क करीब 15 एकड़ में फैला हुआ है। इसके पीछे की तरफ भी लगभग इतनी ही जमीन पड़ी है, जहां पर पूरा जंगल है और अमूमन सालभर जलभराव रहता है। इस कारण इस जमीन पर शिवालय बनाने के लिए कहा गया था। हालांकि प्रोजेक्ट अभी फाइनल नहीं है, अभी विचार ही चल रहा है।