January 21, 2026

संवाददाता
कानपुर।
छोटी-छोटी बातें भूलना, अपनी कही बात याद न रहना या किसी जानकारी को समझने में कठिनाई महसूस करना सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि ‘ब्रेन फॉग’ की समस्या हो सकती है। मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक तेजी से उभरती मानसिक स्थिति है, जो विशेष रूप से तनावपूर्ण और डिजिटल जीवनशैली जीने वाले लोगों को प्रभावित कर रही है।
ब्रेन फॉग के प्रमुख लक्षणों में कमजोर याददाश्त, ध्यान केंद्रित न कर पाना, मानसिक थकावट, उलझन, निर्णय लेने में परेशानी और कभी-कभी बोलने में लड़खड़ाहट शामिल हैं।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के न्यूरोसाइंस और मनोरोग विभाग में ऐसे कई मरीज रोजाना पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों में तनाव बढ़ना, अत्यधिक काम का दबाव, नींद की कमी, संक्रमण और पोषण की कमी इसके बड़े कारण हैं।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष सिंह के अनुसार, ब्रेन फॉग कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक मानसिक स्थिति है जो भूलने और ध्यान में कमी को दर्शाती है। इसका मुख्य कारण हार्मोनल असंतुलन होता है। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह मोटापा, असामान्य मासिक धर्म और मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों को भी जन्म दे सकता है।
मनोरोग विभाग के अध्यक्ष प्रो. धनंजय चौधरी ने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ मस्तिष्क में स्वाभाविक बदलाव आते हैं, लेकिन आज यह समस्या कम उम्र के लोगों में भी तेजी से बढ़ रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह स्मार्टफोन, टैबलेट और कंप्यूटर का अत्यधिक उपयोग है। लगातार स्क्रीन देखने से नींद प्रभावित होती है, जिससे तनाव बढ़ता है और हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बचाव के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और डिजिटल डिटॉक्स बेहद जरूरी है। इसके साथ ही, काम और आराम के बीच संतुलन बनाना तथा समय-समय पर मानसिक स्वास्थ्य की जांच कराना भी आवश्यक है। यदि समय रहते सतर्कता बरती जाए, तो इस समस्या से बचा जा सकता है और मानसिक स्पष्टता को फिर से प्राप्त किया जा सकता है। 

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