April 4, 2025

आ स. संवाददाता 
कानपुर।
  सीएए को लेकर हुई हिंसक घटनाओं की  कार्रवाई को लेकर फिर से समीक्षा होगी। यह समीक्षा इंटेलीजेंस डिपार्टमेंट पुलिस के साथ मिलकर कर रहा है। इसके लिए सन 2019 में हुई सभी घटनाओं और दर्ज एफआईआर का ब्योरा पुलिस अधिकारियों ने इंटेलीजेंस डिपार्टमेंट के अधिकारियों को उपलब्ध करा दिया है।
नागरिकता संशोधन कानून को लेकर कानपुर में सन 2019 में हिंसकर घटनाएं हुई थी। जिसमें प्रदर्शनकारियों की मौत भी हुई थी। इसके बाद पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए मुकदमें दर्ज किए। साथ ही उपद्रवियों को चिन्हित करते हुए जेल भेजा था। घटना के दौरान राज्य सम्पत्तियों को भी नुकसान पहुंचाया गया था। जिसकी वसूली प्रदर्शनकारियों से कराई गई थी। हालांकि सभी मामलों में से ज्यादातर में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। अब इन सभी मामलों में दोबारा समीक्षा की जाएगी।
20 दिसम्बर 2019 को बाबूपुरवा क्षेत्र में नागरिक संशोधन कानून के विरोध में हिंसक घटना हुई थी। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने मौके पर पहुंची पुलिस पर पथराव, फायरिंग करके एसिड बम फेंके थे। पुलिस ने पहले प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया मगर जब मामला बिगड़ता चला गया तब पुलिस को उपद्रवियों पर काबू पाने के लिए फायरिंग करनी पड़ी थी। जिसमें तीन प्रदर्शनकारियों रईस, सैफ और आफताब की मौत हो गई थी। इस घटना को लेकर पुलिस ने दावा किया था कि पुलिस की गोली से कोई नहीं मरा। प्रदर्शनकारी गोली बारी कर रहे थे उसी में उनकी मौत हुई। इस घटना के बाद पुलिस ने 500 से ज्यादा लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। बाबूपुरवा के बाद 21 दिसम्बर 2019 को परेड के यतीमखाना के पास हिंसक घटना हुई थी। इसे लेकर कर्नलगंज थाने में भी एफआईआर दर्ज की गई थी।
हिंसक घटनाओं के दो बड़े मामलों को दर्ज करने के बाद पुलिस ने उपद्रवियों के खिलाफ अलग अलग धाराओं में शहर के अलग अलग थानों में एक दर्जन से अधिक मामले अलग अलग धाराओं में दर्ज किए थे।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक अब इन सभी दर्ज मामलों की  इंटेलीजेंस डिपार्टमेंट दोबारा समीक्षा कर रहा है। जिसमें यह पता किया जा रहा है कि जो दर्ज मामले थे उनमें कितनों में कार्रवाई हुई और कितनों में कार्रवाई नहीं हो सकी। जिनमें कार्रवाई नहीं हुई उसके पीछे कारण क्या रहा। यह समीक्षा पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
एडीशनल सीपी कानून व्यवस्था हरीश चन्दर ने बताया कि यह पुलिस विभाग का अंदरूनी मामला है। इस तरह की समीक्षा रूटीन में होती रहती है। पुलिस इंटेलीजेंस डिपार्टमेंट की समीक्षा करने में मदद कर रहा है और जो जानकारी विभाग द्वारा मांगी जा रही है। वो उपलब्ध कराई जा रही है।