
संवाददाता
कानपुर। आईआईटी में बीटेक स्टूडेंट ने आत्महत्या कर ली। उसने पहले हाथ की नसें काटीं, फिर हॉस्टल के कमरे में फंदे से लटक गया। पुलिस को कमरे से एक सुसाइड नोट मिला, जिसमें लिखा था- सॉरी एवरीवन।
बायोलॉजिकल साइंस से बीटेक के छात्र जय सिंह मीणा राजस्थान के अजमेर के रहने वाले थे। जय सिंह हास्टल के ब्लाक-2 के कमरा नंबर 148 में रहते थे। आज वह परिजनों का फोन नहीं उठा रहे थे।
परिजनों की सूचना पर दोस्त हॉस्टल पहुंचे। काफी देर तक दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं आया। छात्रों ने खिड़की से झांक कर देखा, तो शव फंदे पर लटक रहा था। तुरंत प्रबंधन और पुलिस को मामले की जानकारी दी गई।
कल्याणपुर पुलिस कमरे का दरवाजा तोड़ कर अंदर पहुंची। छात्र के शव को फंदे से उतारकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा।
पुलिस का कहना है कि जय सिंह के घरवालों ने उसके मोबाइल पर कॉल की। मगर कॉल रिसीव नहीं हुई। उन्होंने एक घंटे के अंतराल में कई बार कॉल की। मगर कोई रिस्पांस नहीं आया। तब परिवार वालों ने जय सिंह के एक दोस्त को फोन किया। उसने बताया कि वह हॉस्टल में नहीं है। छुट्टी पर है। इसके बाद उसी दोस्त ने हॉस्टल के अन्य फ्रेंड्स को कॉल की और जय सिंह से बात कराने को कहा। छात्रों ने जय सिंह के कमरे का दरवाजा खटखटाया। मगर अंदर से कोई आवाज नहीं आई।
तब छात्रों ने खिड़की से झांक कर देखा तो जय सिंह का शव पंखे के सहारे चादर के फंदे से लटक रहा था। छात्रों ने आईआईटी प्रशासन को सूचना दी। मौके पर पहुंचे आईआईटी प्रशासन ने कल्याणपुर पुलिस को फोन करके जानकारी दी। मौके पर पहुंचकर कल्याणपुर पुलिस ने दरवाजा तोड़ा। फिर अंदर पहुंचकर छात्र के शव को नीचे उतारा।
फोरेंसिक टीम ने कमरे से साक्ष्य जुटाए। पुलिस को जय सिंह की एक नोटबुक के एक पेज पर सॉरी एवरीवन लिखा मिला। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। छात्र के घरवालों को घटना की सूचना दे दी गई है।
पुलिस ने बताया कि जय सिंह की कलाई में कई घाव मिले हैं। आशंका है कि उसने फंदा लगाने से पहले कलाई की नस काटी थी।
आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र और ग्लोबल आईआईटी एलुमनाई सपोर्ट ग्रुप के संस्थापक धीरज सिंह का कहना है कि यह जानना बहुत जरूरी है कि क्या आईआईटी कानपुर ने माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कैंपस में पिछले आठ आत्महत्या के मामलों के लिए पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई है या नहीं।
ज्यादातर आत्महत्याएं सेमेस्टर के आखिर में होने वाले एग्जाम के आसपास होती हैं। जबकि छुट्टियों के दौरान सबसे कम मामले होते हैं, जो इन दुखद घटनाओं में एकेडमिक स्ट्रेस की मुख्य भूमिका की ओर इशारा करता है। इसके अलावा, 80% से ज़्यादा आत्महत्याएं कैंपस के अंदर हुईं, न कि बाहर, जो कैंपस के माहौल में संभावित स्थानीय कारणों की ओर इशारा करता है।






