
संवाददाता
कानपुर। हजारों मील दूर ऑस्ट्रेलिया के घास के मैदानों से आया एक नन्हा जीव जब कानपुर की मिट्टी पर अपनी मां की सुरक्षित थैली से पहली बार बाहर झांकता है—वह पल कितना मनमोहक होगा। यह कोई कल्पना नहीं, बल्कि कानपुर प्राणी उद्यान की हकीकत है। यहां वलाबी के कुनबे में नन्हे सदस्य के आगमन ने चिड़ियाघर प्रशासन से लेकर वन्यजीव प्रेमियों तक सभी के चेहरे पर मुस्कान ला दी है।
कानपुर जू के क्षेत्रीय वन अधिकारी नावेद इकराम ने बताया कि पिछले वर्ष गुजरात के वनतारा जू से दो जोड़ी वलाबी कानपुर लाए गए थे। इनमें एक जोड़ा स्लेटी रंग का और दूसरा दूधिया सफेद था। खुशखबरी यह है कि ग्रे वलाबी के यहां नन्हा मेहमान आ चुका है, जिससे अब वलाबी की कुल संख्या 5 हो गई है। उत्साह यहीं नहीं थमता—प्रशासन को उम्मीद है कि अगले महीने तक सफेद वलाबी के बाड़े में भी किलकारी गूंजेगी, क्योंकि सफेद मादा वलाबी गर्भवती है।
अक्सर दर्शक वलाबी को कंगारू समझ लेते हैं। दरअसल, वलाबी मार्सुपियल परिवार का सदस्य है और आकार में कंगारू से छोटा होता है। हालांकि इनका कद छोटा है, लेकिन उछल-कूद, फुर्ती और मासूमियत इन्हें खास बनाती है, जो बच्चों से लेकर बड़ों तक का ध्यान खींच लेती है।
प्रकृति ने वलाबी को एक अनोखी थैली दी है। जन्म के समय बच्चा बेहद छोटा और अविकसित होता है। जन्म लेते ही वह रेंगकर मां के पाउच में चला जाता है। नावेद इकराम के अनुसार, बच्चा करीब दो महीने तक पाउच में रहकर सुरक्षित विकास करता है। इसके बाद ही वह पहली बार बाहर झांकता है और धीरे-धीरे दुनिया से परिचित होता है।
अमरूद और यूकेलिप्टस का शौकीन, पूरी तरह शाकाहारी
ये विदेशी मेहमान पूरी तरह शाकाहारी हैं। कानपुर जू में इनके लिए विशेष डाइट तय की गई है। इसका पसंदीदा भोजन अमरूद और यूकेलिप्टस के सूखे पत्ते है, इसे हरी सब्जियां और ताजे फल बेहद पसंद है।
नन्हे वलाबी की मासूमियत देखनी हो तो चिड़ियाघर के सर्प गृह के ठीक पीछे बने विशेष बाड़े में पहुंचा जा सकता है। दर्शकों की सुविधा के लिए प्रशासन ने साइन बोर्ड भी लगाए हैं, ताकि विदेशी मेहमान तक पहुंचना आसान हो।






