
संवाददाता
कानपुर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के 27वें दीक्षांत समारोह में पहुंचीं कुलाधिपति और प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मंच से विश्वविद्यालय की व्यवस्था पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की एनआई आरएफ रैंकिंग में भारी गिरावट आई है, जो बेहद चिंता का विषय है। उन्होंने इसे विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान बताते हुए कहा कि यह साफ संकेत है कि यहां काम ठीक से नहीं हो रहा है। यह स्थिति स्वीकार्य नहीं है। हमें और अधिक मेहनत करनी होगी।
राज्यपाल ने बताया कि जब मैं एक बार विश्वविद्यालय कृषि विज्ञान केंद्र का निरीक्षण करने पहुंची, तो देखा कि वहां के शिक्षक लखनऊ में बैठे हैं और एक स्थानीय व्यक्ति को मात्र 1500 रुपए में रखा गया है। वह व्यक्ति मिट्टी की गुणवत्ता कैसे जांचेगा? यह बेहद गंभीर विषय है।
राज्यपाल ने कुलपति और विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों की ओर इशारा करते हुए कहा कि जब तक आप किसानों के साथ मिलकर काम नहीं करेंगे, बदलाव संभव नहीं है। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के भवनों की जर्जर हालत और छात्रावासों की अव्यवस्थाओं पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि हॉस्टल में न साफ-सफाई है, न पानी की व्यवस्था और ड्रेनेज की हालत भी खराब है।
उन्होंने कहा कि एक ओर हम दीक्षांत समारोह मना रहे हैं और प्रशंसा के गीत गा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
राज्यपाल ने कहा कि जब तक हम स्वयं प्रेरित नहीं होंगे, दूसरों को कैसे प्रेरित करेंगे? उन्होंने अधूरे हॉस्टल की स्थिति पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अभी तक वह शुरू क्यों नहीं हुआ, और नया हॉस्टल कब तक बनकर तैयार होगा। राज्यपाल ने लाइब्रेरी की व्यवस्था पर भी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि वहां नई किताबें उपलब्ध नहीं हैं।
सबसे बुरी हालत डेयरी विभाग की है 400 से 500 गाय हैं, लेकिन दूध उत्पादन नहीं हो रहा। न ही लैब का प्रयोग हो रहा है।
राज्यपाल ने खेल गतिविधियों के न होने पर भी नाराजगी जताई। स्विमिंग पूल बनकर तैयार है लेकिन वह भी बंद पड़ा है। क्या यहां सभी कुछ ठीक है, इसकी समीक्षा जरूरी है। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों से पूछा कि पिछले चार वर्षों में किसानों की आय में कितनी वृद्धि हुई है, इसका रिकॉर्ड पेश करें।
उन्होंने कहा कि एक साल बाद होने वाले दीक्षांत समारोह में प्रगतिशील किसानों को बुलाकर सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने कहा कि स्प्रिंकल खेती से जुड़े आंकड़े भी प्रस्तुत किए जाएं पिछले 5 वर्षों में कहां-कहां यह तकनीक लागू हुई, और उसका प्रभाव क्या रहा।
राज्यपाल ने कहा कि हमें किसानों को ड्रोन तकनीक और आधुनिक खेती के तरीकों से जोड़ना होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि गांवों में जाकर प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएं, न कि किसानों को विश्वविद्यालय बुलाया जाए।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिया कि छात्रों की अंकतालिकाएं डिजिलॉकर में अब तक अपलोड क्यों नहीं की गई हैं, इसका कारण स्पष्ट करें और जल्द से जल्द यह कार्य पूरा किया जाए।
राज्यपाल ने कहा कि हमारा देश गेहूं उत्पादन में दुनिया में दूसरे स्थान पर है, लेकिन अब प्रधानमंत्री मोटे अनाज को बढ़ावा दे रहे हैं। हमें किसानों को समझाना होगा कि गेहूं कम उगाएं और मिलेट्स को बढ़ावा दें। इस दिशा में विश्वविद्यालय को भी ठोस कार्य करना होगा।






