
संवाददाता
कानपुर। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर के अंतर्गत स्थापित प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र सी3आई हब द्वारा आयोजित स्टार्टअप डेमो डे 2025 कनेक्ट 1.0 का शुभारंभ अत्यंत उत्साहजनक वातावरण में हुआ, जिसमें इसके साथ जुड़े स्टार्टअप्स ने पाँच अत्याधुनिक और स्वदेशी तकनीकों पर आधारित उत्पादों का अनावरण किया। यह आयोजन भारत की रक्षा, निगरानी, साइबर सुरक्षा और गहन तकनीक डीप-टेक के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। इस अवसर पर सरकारी अधिकारियों, शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों और निवेशकों की व्यापक भागीदारी रही। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि सी3आई हब भारत को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।
इस आयोजन में प्रस्तुत किए गए प्रमुख नवाचारों में ऐसे उत्पाद शामिल हैं जो भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, साइबर अपराध की रोकथाम और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी हैं। एयरोसिस एविएशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा एलीमिनेटर कामिकाज़े ड्रोन नामक एक ऐसा ड्रोन प्रस्तुत किया गया जो जीपीएस की अनुपस्थिति में भी काम करता है और लक्ष्य पर सटीक स्वचालित हमला करने में सक्षम है। वहीं मराल एयरोस्पेस ने ‘तेजस्वान’ नामक उच्च ऊँचाई पर उड़ने वाले सौर ऊर्जा चालित मानव रहित विमान को प्रस्तुत किया जो लगातार 12 घंटे तक निगरानी व खुफिया गतिविधियों के लिए कार्य कर सकता है। ब्लॉकचेन क्षेत्र में सिक्योरडीऐप ने सिक्योरट्रेस नामक एक फॉरेंसिक मंच विकसित किया है जो अवैध लेन-देन को ट्रेस करने और जांच के लिए स्वचालित उपकरण प्रदान करता है।
एक्सआईओटीज़ ने ऐसा ढाँचा प्रस्तुत किया है जो अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुसार पूर्व-निर्मित अनुपालन सुविधाएँ प्रदान करता है। सप्तंग लैब्स द्वारा ब्लैकफेन्स नामक एक राष्ट्रव्यापी साइबर खतरा विश्लेषण प्रणाली प्रस्तुत की गई है जो धोखाधड़ी, फिशिंग, पहचान की चोरी और ब्रांड दुरुपयोग जैसी समस्याओं से निपटने में सहायक है। इन सभी नवाचारों ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अब तकनीकी समाधान केवल आयातित नहीं करेगा, बल्कि स्वयं भी विश्वस्तरीय समाधान विकसित करने में सक्षम है।
कार्यक्रम में इन उत्पादों की प्रदर्शनी के साथ-साथ कई विचारशील संवाद सत्रों का आयोजन भी किया गया, जिनमें साइबर सुरक्षा, नवाचार, सरकारी भागीदारी, और उभरते हुए स्टार्टअप पारिस्थिति की तंत्र की चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा हुई। इन संवादों से यह संदेश गया कि सरकार, शिक्षा जगत और नवाचार क्षेत्र के बीच समन्वय से ऐसे समाधान विकसित किए जा सकते हैं जो न केवल स्वदेशी हों, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी प्रतिस्पर्धा कर सकें। इसके साथ ही, एक विशेष सत्र में आठ स्टार्टअप्स ने अपने नवीन विचारों को निवेशकों के समक्ष प्रस्तुत किया, जिससे उन्हें आगे बढ़ने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन और अवसर प्राप्त हो सके।
इस अवसर पर आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने सी3आई हब की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि इस केंद्र की स्थापना भारत में साइबर सुरक्षा की तकनीकों को विकसित करने और उन्हें व्यवहारिक समाधान के रूप में प्रस्तुत करने के उद्देश्य से की गई थी। उन्होंने बताया कि प्रस्तुत किए गए उत्पाद और अब तक के 50 से अधिक स्टार्टअप्स की प्रगति इस दिशा में एक ठोस कदम है। साथ ही यह भी कहा कि आज के समय में जब साइबर हमलों की संख्या हर वर्ष कई गुना बढ़ रही है, तब ऐसे समाधान अत्यावश्यक हैं जो सस्ते, मजबूत और पूरी तरह स्वदेशी हों, जिससे बाहरी निर्भरता समाप्त हो सके। प्रोफेसर अग्रवाल ने आगे कहा कि सरकार, शिक्षा संस्थानों और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग बढ़ने और सरकारी व निजी निवेश की भागीदारी से स्टार्टअप्स को वह ताकत मिल रही है जिससे वे साइबर अवसंरचना और सुरक्षा के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बना सकें।
कार्यक्रम का उद्घाटन राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वयक नवीन कुमार सिंह आईपीएस द्वारा किया गया, जो इस आयोजन के मुख्य अतिथि थे। उनके अलावा इस अवसर पर अमित ए. शुक्ला संयुक्त सचिव, साइबर कूटनीति, विदेश मंत्रालय, डॉ. गौरव गुप्ता निदेशक, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, डॉ. गुलशन राय पूर्व राष्ट्रीय समन्वयक, साइबर सुरक्षा एवं निदेशक, सीईआरटी-इन, मेजर साधना सिंह सलाहकार, नीति आयोग, लक्ष्मी नायर वैश्विक प्रभारी, एनटीटी डाटा, विजयंता गौर महानिदेशक, साइबर सुरक्षा संघ, भारत, वेंकटरमण रामकृष्णन (प्रमुख, साइबर सुरक्षा परामर्श, एलएंडटी), अमिताभ मुखर्जी निदेशक, साइबर सुरक्षा, सिमेंस, अभिषेक कक्कड़ उपाध्यक्ष, इंडिया एंजेल नेटवर्क, विभोर शर्मा साझेदार, कैपिटल 2बी, अजय मोदी निदेशक, पाइपर सेरिका और डॉ. भरत पांचाल बीमा सुगम फेडरेशन जैसी कई विशिष्ट हस्तियाँ उपस्थित रहीं। सी3आई हब के कार्यक्रम निदेशक प्रो. सोमित्र सनाध्या और मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. तनीमा हाजरा ने कार्यक्रम का संचालन किया।