
संवाददाता
कानपुर। आईआईटी में सुसाइड करने वाली जूनियर टेक्नीशियन अंजू कुमारी की मां कि करुण पुकार से लोगों के दिल पसीज गए, मृतका की मां कह रही थी कि – हे भगवान ये मेरी बेटी को क्या हो गया, एक बार तो मेरी बच्ची का चेहरा दिखा दो, आखिरी बार उसे देख लें…। सुसाइड के बाद जूनियर टेक्नीशियन के परिजन कानपुर पहुंचे थे। परिजन पोस्टमार्टम हाउस में भी गुमसुम बैठे रहे। इस दौरान उन्होंने किसी प्रकार की बात करने से इंकार कर दिया।
मूलरूप से झारखंड राज्य के जादूगोडा, पूर्व सिंह भूमि के यूसीआईएल के सेक्टर सी की रहने वाली 29 वर्षीय अंजू कुमारी आईआईटी में जूनियर टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत थी और कैंपस में ही निवास करती थी। पुलिस के मुताबिक वह देर रात आफिस से अपने आवास टाइप एल रुम नंबर 102 में चली गई थी, जहां दुपट्टे के सहारे पंखे से फंदा लगा कर आत्महत्या कर ली। सुबह ज़ब कार्यालय जाने के लिये महिला सहयोगी आई तो दरवाजा अंदर से बंद था।
काफी देर तक दरवाजा खटखटाने पर भी जब अंदर से कोई आहट नहीं मिली तो उन्होंने इसकी जानकारी आईआईटी प्रशासन को दी, जिसके बाद आईआईटी प्रशासन की सूचना पर एडीसीपी कपिल देव सिंह समेत पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची और दरवाजा तोड़कर अंदर दाखिल हुई तो महिला टेक्नीशियन का शव फंदे से लटकता मिला। जिसके बाद मौके पर पहुंची फारेंसिक टीम ने साक्ष्य संकलित किए और मोबाइल को कब्जे में लिया था।
पुलिस की जांच में सामने आया था कि अंजू की ओडिशा निवासी युवक से तय हुई थी। बताया जा रहा है वैलेंटाइन डे पर युवक ने अंजू को फोन मिलाया था, फोन न उठने पर मंगेतर नाराज हो गया, जिस कारण दोनों के बीच विवाद हो गया। जिससे परेशान होकर अंजू ने सुसाइड कर लिया। पुलिस को कमरे से डायरी व कागज के कुछ फटे हुए टुकड़े मिले थे।
मृतका के परिजनो के कानपुर पहुंचने के बाद कल्याणपुर पुलिस ने पंचायतनामा भरकर शव का पोस्टमार्टम शुरू कराया।
शाम करीब 4 बजे मृतका अंजू की बॉडी परिजनों को सौंपी गई तो सुबह से गुमसुम बैठी मां के सब्र का बांध टूट पड़ा। वह दौड़ते हुए बेटी के शव के पास पहुंची और एक बार चेहरा दिखाने की मिन्नत करती रही, कई बार साथ आए लोगों ने समझाने का प्रयास किया, लेकिन मां नहीं मानी। जिस पर परिजनों ने आखिरी बार अंजू के चेहरे से कफन हटाया तो मां बिलखते हुए बोली– मेरी रानी बिटिया को ये क्या हो गया, कोई बात थी तो एक बार मुझे बताती। इतना कहते ही उनके कदम लड़खड़ा गए, जिस पर परिजनों ने उन्हें सहारा दिया।
इसके बाद परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार भैरोघाट स्थित शवदाह गृह में किया ।





