
संवाददाता
कानपुर। शहर के बीचोंबीच बसे ‘एलन फॉरेस्ट’ में बने कानपुर चिड़ियाघर से वन्यजीव प्रेमियों के लिए अच्छी खबर आई है। आमतौर पर कैद में रहने वाले जानवर तनाव के कारण प्रजनन से कतराते हैं, लेकिन यहां का प्राकृतिक और घना जंगलनुमा वातावरण इस धारणा को गलत साबित कर रहा है। पिछले तीन साल में चिड़ियाघर की कुल वन्यजीव आबादी में 15 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर नवेज़ इकराम के मुताबिक, एलन फॉरेस्ट का विस्तृत और प्राकृतिक परिवेश जानवरों को अपने मूल आवास जैसा अहसास देता है, जिससे वे सहज होकर प्रजनन कर पा रहे हैं।
चिड़ियाघर की सबसे बड़ी सफलता भारतीय गौर (बाइसन) की ब्रीडिंग रही है। दक्षिण भारत के जंगलों में पाए जाने वाले इन बाइसन को उत्तर भारत के माहौल में ढालना चुनौती माना जा रहा था। साल 2022 में दो बाइसन कानपुर लाए गए थे। बेहतर देखभाल और अनुकूल वातावरण के चलते उन्होंने न सिर्फ यहां खुद को ढाला बल्कि सफल प्रजनन भी किया। अब इनकी संख्या दो से बढ़कर चार हो गई है।
इसी कड़ी में हाल ही में लाए गए ‘ढोल’ (जंगली कुत्ते) ने भी पहली बार ब्रीडिंग करके चिड़ियाघर प्रबंधन को बड़ी उपलब्धि दिलाई है।
चिड़ियाघर में करीब 15 से 20 ऐसी प्रजातियां हैं जिनकी संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। इनमें मुख्य रूप से झुंड में रहने वाले शाकाहारी जीव शामिल हैं।
पाढ़ा (हॉग डियर), बारहसिंघा (स्वैंप डियर), ब्लैक बक और चीतल (स्पॉटेड डियर) की आबादी तेजी से बढ़ी है। अधिकारियों के अनुसार, इन जीवों को एलन फॉरेस्ट का प्राकृतिक माहौल इतना अनुकूल लग रहा है कि इनकी प्रजनन दर खुले जंगल जैसी नजर आ रही है।
चिड़ियाघर प्रशासन अब शेरों और गेंडों की संख्या बढ़ाने की तैयारी में है। मौजूदा शेरनी की उम्र अधिक होने से ब्रीडिंग में आ रही बाधा को देखते हुए इंदौर चिड़ियाघर से नई शेरनी लाने का सौदा तय हो चुका है। अगले दो महीनों में नई शेरनी कानपुर पहुंचेगी, जिससे एशियाई शेरों के शावकों की उम्मीद जगी है।
वहीं गेंडों के मामले में ‘गौरी’ के जाने के बाद नया एक्सचेंज प्लान तैयार किया गया है। योजना के तहत एक नर गेंडा देकर मादा गेंडा लाया जाएगा, ताकि गेंडों का कुनबा भी आगे बढ़ सके।
पिछले 4-5 वर्षों का रिकॉर्ड देखें तो कानपुर चिड़ियाघर की इन्वेंटरी यानी कुल वन्यजीव संख्या का ग्राफ लगातार ऊपर गया है। रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर नवेज़ इकराम का कहना है कि 20 प्रतिशत तक की प्रजनन वृद्धि बड़ी उपलब्धि है।
हालांकि अन्य चिड़ियाघरों से सीधा मुकाबला नहीं है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि कानपुर का एलन फॉरेस्ट न सिर्फ वन्यजीवों को सुरक्षित रख रहा है, बल्कि उन्हें इतना सहज वातावरण दे रहा है कि वे अपनी अगली पीढ़ी को जन्म दे रहे हैं।






