
संवाददाता
कानपुर। नगर में हुए गैंगरेप केस में पुलिस की लापरवाही पर कोर्ट भी नाराज हुआ। 5 जनवरी की रात को गैंगरेप होने के बाद 8 जनवरी को पीड़िता को कोर्ट लाया गया। यहां पहले तो 3 घंटे तक पुलिस जांच अधिकारी नहीं पहुंचे। पीड़िता रूम के बाहर बैठी रही।
जब जांच अधिकारी पेश हुए, तो जज ने पूछा कि लड़की 14 साल की है, मगर आपने पॉक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज ही नहीं किया है। पहले जाइए, पॉक्सो में मुकदमा दर्ज करिए, तब पीड़िता के बयान दर्ज कराने आइएगा।
कोर्ट की नाराजगी के बाद पीड़िता के बयान दर्ज नहीं हो सके। पुलिस पीड़िता को नोएडा नंबर की लाल रंग की कार में बैठाकर चली गई।
मामले की शुरुआत 5 जनवरी की रात 10 बजे हुई थी। 14 साल की पीड़िता घर से निकली थी। उसने बताया कि मुझे स्कॉर्पियो में बैठे दरोगा अमित कुमार मौर्य और यूट्यूबर शिवबरन यादव ने जबरन गाड़ी के अंदर खींच लिया।
फिर सचेंडी में रेलवे ट्रैक के किनारे लेकर गए। मैं चीखती चिल्लाती रही, मगर सुनने वाला कोई नहीं था। सुनसान जगह पर ले जाकर दोनों ने गाड़ी के अंदर ही मुझसे गैंगरेप किया। करीब 2 घंटे बाद पीड़िता को बेहोशी की हालत में घर के बाहर फेंककर दोनों आरोपी भाग गए।
रात 12 बजे पीड़ित ने पुलिस को कॉल किया और गैंगरेप के बारे में सूचना दी। पीड़िता अपने भाई के साथ चौकी पहुंची, जहां उसे डांटकर भगा दिया गया। पुलिस कमिश्नर से मिलकर पीड़िता ने शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद अज्ञात में गैंगरेप और अपहरण की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।
इस मामले में पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने डीसीपी वेस्ट दिनेश चंद्र त्रिपाठी को हटा दिया है। सचेंडी इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को सस्पेंड कर दिया है। आरोपी दरोगा की तलाश में 4 टीमें गठित कर दी गईं। पुलिस ने पीड़िता को संवासिनी गृह भेज दिया।
रेप होने के तीसरे दिन 3 दरोगा और महिला कॉन्स्टेबल के साथ पीड़िता बयान दर्ज कराने के लिए अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रथम की कोर्ट में दोपहर करीब 12 बजे पहुंची। 3 घंटे तक पीड़िता कोर्ट में बैठी रही, लेकिन मामले के जांच अधिकारी सुभाष चंद्र कोर्ट नहीं पहुंचे। करीब 3.30 बजे दरोगा कोर्ट पहुंचे, लेकिन मुकदमे में पॉक्सो एक्ट की धाराएं ही नहीं बढ़ाई गई थी। जिस पर कोर्ट ने जांच अधिकारी को कड़ी फटकार लगाई और धाराएं बढ़ाकर पीड़िता के बयान दर्ज कराने के आदेश दिए।
इसके बाद शाम करीब 4.30 बजे पुलिस कड़ी सुरक्षा में पीड़िता को लेकर कोर्ट से निकली, जहां मीडियाकर्मियों ने उससे बात करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने बात नहीं करने दी। पीड़िता सिर्फ यही कहती रही कि मुझे घर जाना है, मुझे कहीं और मत भेजिए। इसके बाद पुलिस महिला थाने के पास खड़ी लाल रंग की नोएडा नंबर की कार से पीड़िता को लेकर निकल गई।
पूरे घटनाक्रम के बाद पीड़िता का भाई बिफर पड़ा, पुलिस के तौर तरीको से परेशान होकर उसने कहा कि पुलिस अपने डिपार्टमेंट के दरोगा को बचाने का काम कर रही है। मेरी बहन को तीन दिन से दौड़ाया जा रहा है, दो दिन से मुझे दौड़ाया जा रहा है, न उसके बयान दर्ज हो रहे और न ही उसको घर भेजा जा रहा है।
पीड़िता के भाई ने आगे कहा कि आरोपियों की ओर से लगातार धमकी दी जा रही है कि 10 लाख रुपए ले लो और समझौता कर लो। बहन ने मुझे रोते हुए बताया कि जहां पर उसे रखा जा रहा है, वहां कोई सुरक्षा नहीं है, मुझे घर लेकर चलो। साथ ही, उसने बताया कि विवेचक दरोगा सुभाष चंद्र ने घटना के दिन भी उसकी कोई बात नहीं सुनी।
भाई ने कहा कि आरोपी शिवबरन मेरे घर आकर धमका रहा था कि अगर मेरा नाम आया तो चौकी में मारूंगा। मेरी बहन इस लड़के को पहचान गई है, तो कह रहा कि झूठा फंसाया जा रहा है।
शिवबरन और दरोगा ने मेरी बहन के साथ गलत हरकत की है, पता नहीं क्या चल रहा है, मेरी बहन न खा रही है, न पी रही है। न पुलिस वाले घर भेज रहे, न मेरी मां है, मेरे बाप अपाहिज हैं, पता नहीं क्या चल रहा है।
एडीसीपी वेस्ट कपिल देव सिंह ने बताया कि पीड़िता का मेडिकल कल्याणपुर सीएचसी में कराया गया था। जिसकी रिपोर्ट में रेप की आशंका जाहिर की गई है, विस्तृत जांच के लिए स्लाइड्स बनाकर लैब भेजी गई है। साथ ही, दरोगा की बरामद स्कॉर्पियों की भी फोरेंसिक जांच कराई गई है। जांच में यह भी सामने आया है, घटना के समय 20 मिनट तक आरोपी दरोगा मौके पर था।
वहीं मामले में आरोपी शिवबरन यादव को आज जेल भेजा गया। जेल जाने के दौरान आरोपी ने कहा कि मैं निर्दोष हूं, अगर गलत किया हो तो मुझे फांसी दी जाए। दरोगा जी और मैने कोई रेप नहीं किया है, मैं पीड़िता को पहचानता भी नहीं हूं।
इस पूरे प्रकरण में एडीसीपी वेस्ट कपिल देव सिंह ने बताया- मुकदमे में पॉक्सो एक्ट की धाराएं नहीं बढ़ने की वजह से गुरुवार को पीड़िता के बयान दर्ज नहीं हो सके। विवेचक के देरी से कोर्ट पहुंचने की बात पर उन्होंने कहा कि मुझे इस तरह की कोई जानकारी नहीं है। अगर विवेचक देरी से कोर्ट पहुंचे हैं तो कार्रवाई की जाएगी। मामले की पूरी जांच सचेंडी इंस्पेक्टर दीनानाथ मिश्रा को सौंपी गई है।
एडीसीपी वेस्ट ने बताया- आरोपी शिवबरन की गिरफ्तारी होने के बाद दरोगा अमित कुमार मौर्य को आशंका हो गई होगी कि उसकी गिरफ्तारी हो सकती है। उसने अपने दोनों मोबाइल स्विच ऑफ कर लिए हैं। आरोपी की आखिरी लोकेशन बर्रा इलाके में मिली है। दरोगा महाराजगंज का रहने वाला है, वहीं गोरखपुर और मेरठ में उसके छिपने का अनुमान हम लगा रहे हैं, यहां पुलिस टीमें भेजी गईं हैं।
पूरे प्रकरण में कांग्रेस पार्टी पीड़िता के समर्थन में उतर आई है। कांग्रेस ग्रामीण के जिलाध्यक्ष संदीप शुक्ला पूरे दिन पीड़िता के साथ कोर्ट रूम में मौजूद रहे और पूरे मामले की जानकारी लेते रहे। उन्होंने बताया कि पीड़िता के घंटों बैठने के बाद भी बयान नहीं कराए जा सके। अधिकारियों को मामले में सतर्कता बरतनी चाहिए।
यह संवेदनशील मामला है, इस तरह की लापरवाही ठीक नहीं है। पुलिस की कार्यशैली का इस बात से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि विवेचक कोर्ट ही नहीं पहुंचे। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने मामले को संज्ञान में लिया है। हम लोग पीड़िता को इंसाफ मिलने पर पीड़िता के साथ रहेंगे।
इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता सईद नकवी ने कहा कि नियमानुसार पीड़िता के बयान कोर्ट में तत्काल होने चाहिए थे। कल भी पुलिस पीड़िता को कोर्ट लेकर आई थी, लेकिन उसके बयान नहीं करा सकी। बयान क्यों नहीं हुए, इसका अभी तक कोई पता नहीं चला है। विवेचक की घोर लापरवाही है कि पूरे दिन वह कोर्ट नहीं पहुंचे।






