
संवाददाता
कानपुर। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर कानपुर के सभी छोटे बडे शिवालय हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से गूंज उठे। देर रात से ही श्रद्धालुओं का सैलाब शहर के प्रमुख और प्राचीन मंदिरों की ओर उमड़ पड़ा। भक्ति, आस्था और उल्लास के संगम ने पूरे शहर को शिवमय कर दिया।
गंगा तट से लेकर गली-मोहल्लों तक शिवभक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। कानपुर का हर कोना शिवभक्ति में रंगा नजर आया। गूंजते मंत्र, जलाभिषेक की धाराएं, दीपों की लौ और भक्तों का उत्साह—इन सबने मिलकर पर्व को और भी यादगार बना दिया।
महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और पंचामृत से रुद्राभिषेक किया। “ॐ नमः शिवाय” के मंत्रोच्चार के बीच मंदिरों में विशेष पूजन-अर्चन हुआ। प्रमुख शिवालयों—आनन्देश्वर मंदिर, जागेश्वर सिद्धनाथ मंदिर, वनखण्डेश्वर मंदिर, सिद्धनाथ मंदिर और खेरेश्वर मंदिर—में रात से सुबह तक भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं।
गंगा किनारे स्थित आनंदेश्वर धाम में देर रात से ही श्रद्धालु पहुंचने लगे। रात डेढ बजे मंगला आरती के बाद जैसे ही मन्दिर के पट खुले तो भक्तों ने बाबा की जयकार के साथ उनके दर्शन और पूजा अर्चना की।
कमोवेश ऐसा ही नजारा शहर के जागेश्वर, सिद्धनाथ वनखन्डेश्वर और खेरेश्वर मन्दिरों में रहा जहां शिव की अराधना को लेकर देर रात से ही भक्तों का तांता लगा रहा। भोर होते-होते भक्तों की संख्या हजारों में पहुंच गई। मंदिर परिसर और आसपास के घाटों पर “बोल बम” के नारे गूंजते रहे। श्रद्धालु गंगाजल लेकर भोलेनाथ का अभिषेक करते नजर आए। कई भक्तों ने कठिन व्रत रखकर दिनभर उपवास भी रखा ।
शहर के आनन्देश्वर, जागेश्वर सिद्धनाथ और वनखण्डेश्वर मंदिरों में विशेष साज-सज्जा की गई थी। फूलों, दीपों और आकर्षक विद्युत रोशनी से शिवालय जगमगा उठे। मंदिर समितियों की ओर से भजन-कीर्तन और रुद्राभिषेक के कार्यक्रम आयोजित किए गए। ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के साथ आरती हुई, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
मंदिरों में सुबह से शाम तक दर्शन-पूजन का सिलसिला चलता रहा। श्रद्धालुओं में युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों की बड़ी भागीदारी रही। बच्चों ने भी माता-पिता के साथ शिवलिंग पर जल चढ़ाकर आशीर्वाद लिया। कई स्थानों पर भक्तों ने बेलपत्र, धतूरा, भांग और फल अर्पित किए—जो शिवभक्ति की परंपरा का अभिन्न हिस्सा माने जो हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। मंदिरों के आसपास बैरिकेडिंग, यातायात व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहा। स्वयंसेवी संगठनों और समाजसेवियों ने श्रद्धालुओं के लिए जल, प्रसाद और चिकित्सा सहायता की व्यवस्था की। कहीं-कहीं भंडारे और प्रसाद वितरण भी किया गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का पर्व है। इस दिन व्रत, रात्रि जागरण और अभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि सच्चे मन से शिव की आराधना करने से दुख-दरिद्रता दूर होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इसी आस्था के साथ नगरवासियों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा से यह पर्व मनाया।
शहर के शिवालयों में उमड़ी आस्था की यह भीड़ न सिर्फ धार्मिक विश्वास का प्रतीक बनी, बल्कि शहर की सांस्कृतिक एकता और परंपरा की तस्वीर भी पेश कर गई।





