—दसलक्षण पर्व में भगवान आदिनाथ, शांतिनाथ और पार्श्वनाथ का हुआ अभिषेक।

संवाददाता
कानपुर। आनंदपुरी स्थित श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में दसलक्षण पर्व का द्वितीय दिवस शुक्रवार को बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह से ही मंदिर प्रांगण में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जन पहुंचने लगे और भगवान आदिनाथ, भगवान शांतिनाथ एवं भगवान पार्श्वनाथ जी का भव्य अभिषेक किया गया।
डा. अनूप जैन ने बताया कि अभिषेक के उपरांत शांतिधारा संपन्न हुई। प्रथम शांतिधारा का सौभाग्य अनुज जैन, अतिशय जैन परिवार को, द्वितीय शांतिधारा का सौभाग्य विवेक जैन के परिवार को तथा तृतीय शांतिधारा करने का मौका संजय जैन परिवार को प्राप्त हुआ।
इसके पश्चात ईसरी से पधारे विद्वान संजीव जैन ने महान जैन ग्रंथ तत्वारसूत्र का अर्थ सहित वाचन किया, जिसे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक सुना। मान्यता है कि इस सूत्र के श्रवण मात्र से ही एक उपवास के पुण्य का लाभ स्वतः प्राप्त होता है।
इसके बाद भोपाल से आए भूपेंद्र जैन के झंकार ग्रुप ने संगीतमय नित्य नियम पूजन कराया। भक्ति गीत, नृत्य और भजनों के माध्यम से भक्तों ने गहन आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति की।
शाम को उत्तम मार्दव धर्म पर विशेष प्रवचन देते हुए विद्वान संजीव जैन ने कहा कि अहंकार सदा पतन का कारण बनता है, जबकि विनम्रता जीवन का सच्चा आभूषण है। यही है उत्तम मार्दव धर्म, जो हमें सिखाता है कि सरलता और नम्रता से ही सच्चा सुख और शांति मिलती है। जहां विनम्रता होती है, वहां प्रेम, सौहार्द और समृद्धि अपने आप आ जाते हैं।
प्रवचन के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रभावना मंडल द्वारा कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें समाज के ही कवियों ने भक्ति रस, वीर रस और हास्य रस से भरपूर काव्य पाठ किया, जिसका उपस्थित जनसमूह ने आनंद लिया।
इस अवसर पर महेंद्र कटारिया, डॉ. अनूप जैन, संजीव जैन नेता जी, अशोक जैन, अनिल जैन, अमित बंटी, विनोद, मनीष, निर्मला जैन, मैना, राजुल, ज्योति, सीमा, रचना सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित रहे।






