February 15, 2026

— दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्रों पर नही लगे है चेतावनी संकेतक।

आ.स.संवाददाता 

कानपुर। नगर से होकर गुजर रहे राजमार्ग कानपुर-दिल्ली नेशनल हाईवे पर भौती में सोमवार को हुए भीषण सड़क हादसे में इंजीनियरिंग के चार छात्रों समेत पांच लोंगो की मौत के पीछे बड़ी वजह सामने आई है। लगभग तीन दशकों से यह स्थान दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र घोषित है, सैकड़ो की संख्या में दुर्घटनाएं होने के बावजूद भी संबंधित विभाग नही जागे, ओर कोई सुधार नहीं किया।
इस दर्दनाक हादसे में चार छात्रों समेत 5 की मौत के बाद जिला प्रशासन की दुर्घटना जांच समिति ने मौके पर जाकर जायजा लिया। इस समिति के गठन में डीसीपी ट्रैफिक रवींद्र कुमार, एडीएम सिटी, एआरटीओ प्रशासन, एनएचएआई और पीडब्ल्यूडी के अफसरों ने संयुक्त रूप से खामियों का बारीकी से अध्ययन किया।
अफसरों को जांच में यह पता चला कि यहां दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र घोषित किया गया था। इसके बाद भी चेतावनी देने वाला कोई संकेतक बोर्ड नहीं लगा और सुरक्षा का एक भी इंतजाम नहीं किया गया। यह पूरा हादसा संबंधित विभागों की लापरवाही से हुआ है।
इस समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस जगह भौंती एलिवेटेड रोड उतरता है वहीं एलीवेटेड मार्ग की वाल भी खत्म हो जाती है। एलीवेटेड मार्ग की सर्विस लेन से आने वाला ट्रैफिक भी स्पीड से हाईवे की मेन लेन पर चढ़ता है। इस वजह से ढलान से उतरने वाले वाहन कई बार अचानक ब्रेक लगाते हैं। इस वजह से पीछे से आने वाले वाहन उनसे भिड़ जाते हैं।
हादसों के आंकड़ों पर नजर डालें तो सामने आया कि कानपुर यूपी में सड़क हादसों में जान गंवाने वाले मामलों में शामिल शहरों में सबसे आगे है। मौजूदा समय में नगर में चिन्हित 18 दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र हैं, लेकिन इन पर कोई सुधार नहीं हो सका है। पिछले एक साल में लगभग जिले में 950 लोगों की  सड़क हादसों में दर्दनाक मौतें हुई हैं। इसमें लगभग हर हादसा जिले के दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्रों पर होता है।

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